पटना, 05 अगस्त : बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पिछले दिनों आयोजित पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में पटना में मंदिर निर्माण का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान, पहचान और अधिकार दिलाने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए कदमों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, बोर्ड के सदस्य राजन सिंह ने बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सदस्यों ने सहमति जताई और इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। बैठक के बाद राजन सिंह ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को वर्षों तक सामाजिक सम्मान और सरकारी पहचान नहीं मिली, लेकिन हाल के वर्षों में समुदाय को अधिकार और संस्थागत पहचान मिली है। इसी कारण समुदाय प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता है।
राजन सिंह के अनुसार, प्रस्तावित मंदिर पटना में बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद आगे बढ़ाई जाएगी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से यह भी कहा गया है कि निर्माण से जुड़े खर्च के संबंध में सरकार से अपेक्षा की गई है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक सरकारी घोषणा नहीं हुई है।
बैठक के दौरान बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019 तथा समुदाय के लिए शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी पहलों ने ट्रांसजेंडर समाज को नई पहचान और अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सदस्यों ने इसी को मंदिर निर्माण के प्रस्ताव का आधार बताया।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल यह केवल बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव है। मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटन, बजट, निर्माण एजेंसी और समय-सीमा जैसी प्रक्रियाओं पर राज्य सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मंदिर निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया सरकार के आगामी निर्णयों पर निर्भर करेगी।
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समर्थक इसे ट्रांसजेंडर समुदाय की ओर से आभार प्रकट करने का प्रतीकात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि समुदाय के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर आगे सरकार और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।

















