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अररिया/ नरपतगंज के पलासी ग्राम कचहरी में मौखिक समझौते से सुलझते विवाद, कागजी मुकदमों से बचते ग्रामीण

पलासी ग्राम कचहरी में पांच वर्षों में आधिकारिक रूप से महज तीन मामले, जमीनी व पारिवारिक विवादों का स्थानीय स्तर पर होता है समाधान

नरपतगंज (अररिया) : ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-मोटे विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने के उद्देश्य से गठित ग्राम कचहरी आज भी गांव की न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नरपतगंज प्रखंड की पलासी ग्राम कचहरी इसका एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करती है। यहां जमीनी विवाद से लेकर लड़का-लड़की से जुड़े पारिवारिक मामलों तक को आपसी समझ-बूझ और पंचायत स्तर पर समाधान कराने की कोशिश की जाती है।

पलासी ग्राम कचहरी में वर्तमान समय में कार्यालय की व्यवस्था वर्तमान सरपंच के वार्ड संख्या-6 स्थित आवास से संचालित हो रही है। वहीं वार्ड संख्या-10 में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद ग्राम कचहरी का कार्यालय वहां स्थानांतरित किए जाने की संभावना है।

पांच वर्षों में केवल तीन आधिकारिक मामले

ग्राम कचहरी के सचिव धर्मेंद्र कुमार साह और न्यायमित्र शेखर भारती के अनुसार, पलासी ग्राम कचहरी में विवादों का स्वरूप मुख्य रूप से जमीन से जुड़े मामलों तथा लड़का-लड़की अथवा पारिवारिक विवादों का रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से 2021 के बीच पांच मामले आधिकारिक रूप से दर्ज हुए, जबकि 2021 से 2026 (अगस्त तक) के बीच आधिकारिक रूप से केवल तीन मामले सामने आए।

हालांकि, कम संख्या को ग्राम कचहरी में विवादों की अनुपस्थिति के तौर पर नहीं देखा जा सकता। स्थानीय स्तर पर अनेक मामलों का समाधान औपचारिक केस दर्ज किए बिना ही बातचीत और आपसी सहमति से कराने की कोशिश की जाती है।

रिकॉर्ड में दर्ज होने के डर से आवेदन से बचते हैं लोग

ग्राम कचहरी से जुड़े लोगों के मुताबिक ग्रामीणों में यह धारणा भी है कि एक बार मामला आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाने के बाद उसका स्थायी दस्तावेज तैयार हो जाता है। इसी वजह से कई लोग औपचारिक आवेदन देने से बचते हैं और पहले स्थानीय स्तर पर समझौते का रास्ता तलाशते हैं।

ऐसे मामलों में सरपंच और उनके प्रतिनिधि दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत करते हैं। आपसी सहमति बनने पर विवाद को वहीं समाप्त करने की कोशिश की जाती है। इस प्रक्रिया में सरपंच ममता देवी और उनके प्रतिनिधि ब्रह्मदेव यादव की स्थानीय समझ-बूझ की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है।

आधिकारिक निर्णय में पंचों की भूमिका अहम

ग्राम कचहरी की प्रक्रिया में पंचों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसी आधिकारिक निर्णय के लिए कम से कम सात पंचों के हस्ताक्षर अनिवार्य बताए गए हैं। वहीं विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए सरपंच की अनुशंसा से पहले संबंधित आवेदक के वार्ड के पंच की सिफारिश और आवेदन पर उनके हस्ताक्षर की व्यवस्था भी व्यवहार में देखने को मिलती है। इससे ग्राम कचहरी की व्यवस्था में केवल सरपंच ही नहीं, बल्कि वार्ड स्तर के पंचों की भागीदारी भी सुनिश्चित होती है।

संसाधनों की कमी भी एक चुनौती

पलासी ग्राम कचहरी के सामने संसाधनों से जुड़ी कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। सरपंच को ग्राम कचहरी के काम के सिलसिले में आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता नहीं मिलता, जबकि कार्यालय संचालन से जुड़े खर्चों की भी नियमित निकासी नहीं होने की बात सामने आती है।

इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर विवादों को आपसी सहमति से समाप्त करने की कोशिश जारी रहती है। ग्रामीणों के लिए इसका एक फायदा यह है कि छोटे विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने से उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने का अवसर मिलता है।

कई साल के कार्यकाल में अनुभव का असर

पलासी की वर्तमान सरपंच ममता देवी का कई वर्षों का कार्यकाल ग्राम कचहरी के कामकाज को समझने और स्थानीय विवादों के समाधान में अनुभव हासिल करने का अवसर रहा है। ग्रामीण स्तर पर विवादों की प्रकृति को समझने और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने में यह अनुभव उपयोगी साबित होता है।

ज्ञात हो कि ममता देवी वर्तमान में प्रखंड सरपंच संघ की सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। इस कारण ग्राम कचहरी से जुड़े स्थानीय अनुभवों के साथ-साथ प्रखंड स्तर पर सरपंचों की समस्याओं और उनकी भूमिका से जुड़े मुद्दों को उठाने का अवसर भी उन्हें मिलता है।

मुकदमे से पहले समझौते की कोशिश

पलासी ग्राम कचहरी की कार्यप्रणाली को देखें तो इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह सामने आती है कि यहां विवाद को औपचारिक मुकदमे में बदलने से पहले आपसी बातचीत और समझौते का रास्ता तलाशने पर जोर दिया जाता है।

जमीनी विवाद हो या पारिवारिक विवाद—यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति के लिए तैयार हों तो स्थानीय स्तर पर समाधान कराने की कोशिश की जाती है। आधिकारिक आंकड़ों में मामलों की संख्या कम होना इसी अनौपचारिक समाधान प्रक्रिया का एक संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, ग्राम कचहरी की प्रभावशीलता का वास्तविक आकलन केवल दर्ज मामलों की संख्या से नहीं, बल्कि कितने विवाद औपचारिक प्रक्रिया में जाने से पहले सुलझे और कितने मामलों में पक्षकार संतुष्ट रहे, इससे भी किया जा सकता है। पलासी ग्राम कचहरी में इस दिशा में स्थानीय स्तर पर काम जारी है।

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