2019 में चार परिवारों के साथ सामूहिक रूप से शुरू हुई पूजा से जुड़ चुके हैं अब लगभग 15 परिवार
नई पीढ़ी को परंपरा और संस्कृति से जोड़ने पर जोर
इटहरी (नेपाल), 29 अक्टूबर, 2026 : इटहरी में आयोजित होने वाले एकमात्र चित्रगुप्त पूजा महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष महोत्सव का आठवां आयोजन किया जाएगा। इस सिलसिले में पिछले दिनों (शनिवार) को चित्रगुप्त पूजा समिति के सदस्यों की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूजा महोत्सव के आयोजन, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आयोजन को सफल, व्यवस्थित और अधिक सहभागितापूर्ण बनाने के साथ-साथ अपनी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया।
चार परिवारों से शुरू हुआ सफर, अब लगभग 15 परिवार जुड़े
इटहरी में चित्रगुप्त पूजा की शुरुआत वर्ष 2019 में महज चार परिवारों ने सामूहिक रूप से की थी। सीमित संसाधनों और छोटे समूह के साथ शुरू हुई इस पहल ने धीरे-धीरे सामुदायिक स्वरूप ग्रहण कर लिया। आज इस पूजा आयोजन से लगभग 15 परिवारों का समूह जुड़ चुका है। परिवारों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की भावना भी समाज में मजबूत हो रही है।
समिति के सदस्यों का मानना है कि सामूहिक रूप से आयोजित होने वाला यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चित्रांश परिवारों को एक मंच पर लाने, आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। चार परिवारों से शुरू हुई यह यात्रा आज एक विस्तृत सामुदायिक सहभागिता की ओर बढ़ रही है।
भगवान चित्रगुप्त की आराधना के साथ सत्य, न्याय और कर्तव्य का संदेश
भगवान चित्रगुप्त हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे यमराज के दरबार में जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं। उन्हें मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का अभिलेख रखने वाला तथा कर्मों के आधार पर न्याय की व्यवस्था में सहायक देवता माना जाता है। इसी कारण भगवान चित्रगुप्त की आराधना को सत्य, न्याय, ईमानदारी, उत्तरदायित्व और आत्मचिंतन जैसे मूल्यों से जोड़कर देखा जाता है।
भगवान चित्रगुप्त की पूजा विशेष रूप से चित्रांश समुदाय के लिए आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान चित्रगुप्त से सद्बुद्धि, ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करने की कामना करते हैं। यह पूजा लोगों को अपने कार्यों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश भी देती है।
समिति की बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि धार्मिक आयोजनों का महत्व तभी और अधिक बढ़ता है, जब उनके माध्यम से समाज में अच्छे संस्कारों, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार हो। सदस्यों ने कहा कि नई पीढ़ी को भगवान चित्रगुप्त के धार्मिक महत्व और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में जानकारी देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित रहें और उसे आगे बढ़ाएं।
11 नवंबर को पूजा-अर्चना, शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम
समिति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 11 नवंबर को दिन में भगवान चित्रगुप्त की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न होने के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में युवाओं की ओर से नाटक का मंचन भी किया जाएगा। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी को आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। समिति का मानना है कि नाटक और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी परंपराओं को बेहतर ढंग से समझ सकती है। साथ ही, ऐसे मंच युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, सामाजिक विषयों पर विचार रखने और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
इसके अगले दिन विधि-विधान के साथ भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। पूजा से लेकर विसर्जन तक के सभी कार्यक्रमों को सामूहिक सहभागिता और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है।
चित्रांश परिवारों से शामिल होने की अपील
चित्रगुप्त पूजा समिति ने इटहरी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सभी चित्रांश परिवारों से आठवें चित्रगुप्त पूजा महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। समिति के सदस्यों ने कहा कि अधिक से अधिक परिवारों की भागीदारी से आयोजन को मजबूती मिलेगी और समाज के लोगों के बीच आपसी मेलजोल तथा सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
सदस्यों के अनुसार, विदेश में अथवा अपने मूल स्थान से दूर रहने वाले समुदायों के लिए ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन अपनी पहचान को जीवंत बनाए रखने में विशेष भूमिका निभाते हैं। सामूहिक पूजा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारिवारिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों एवं युवाओं को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।
आठवें पूजनोत्सव को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्य तैयारियों में जुट गए हैं। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था को मजबूत करने, सामाजिक एकता को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। चार परिवारों के छोटे से समूह से शुरू हुई यह पहल अब लगभग 15 परिवारों की सहभागिता के साथ इटहरी में चित्रांश समुदाय को एकजुट करने और अपनी परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

















