भारत मंडपम में मिला राष्ट्रीय सम्मान, मैथिल पाग और पारंपरिक वेशभूषा के जरिए प्रस्तुत की अपनी सांस्कृतिक पहचान
नई दिल्ली / चंडीगढ़ / मधुबनी, 14 अक्टूबर 2026 : उद्यमिता, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए युवा उद्यमी एवं समाजसेवी नीतीश कुमार सिंह को ‘नेशनल आइकन अवॉर्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। भारतीय युवा वेलफेयर एसोसिएशन (BYWA) की ओर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों, पूर्व मंत्रियों और सांसदों की मौजूदगी रही।
इस उपलब्धि के साथ ही नीतीश कुमार सिंह ने अपनी कर्मभूमि चंडीगढ़ के साथ-साथ बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र का गौरव भी बढ़ाया। समारोह में उनकी उपलब्धियों के साथ एक और बात ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वे मैथिल संस्कृति की पहचान पाग, धोती-कुर्ता और दुपट्टा धारण कर सम्मान ग्रहण करने पहुंचे। उनकी यह पहल अपनी मातृभूमि, भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाती है।
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद जगदंबिका पाल तथा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, नेशनल आइकन अवॉर्ड का यह दसवां सीजन था। आयोजन को केंद्रीय गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय का समर्थन एवं सहयोग प्राप्त था।
समाज सेवा को बनाया अपने जीवन का उद्देश्य
मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले से संबंध रखने वाले और वर्तमान में चंडीगढ़ में रह रहे नीतीश कुमार सिंह विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। जरूरतमंदों को सर्दियों में कंबल उपलब्ध कराना, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षण सामग्री देना और रक्तदान शिविरों के आयोजन में योगदान करना उनके सामाजिक कार्यों का हिस्सा रहा है।
उनकी इसी सक्रियता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें पहले भी विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इनमें दरभंगा महोत्सव का ‘मैथिली संस्कृति उत्थान सम्मान’, चंडीगढ़ नगर निगम की ओर से मिला सम्मान तथा दैनिक जनजागरण का ‘जनजागरण सारथी सम्मान’ प्रमुख हैं।
‘मेरी आत्मा और संस्कार मिथिलांचल की मिट्टी में बसते हैं’
सम्मान ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार सिंह ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रयासों को पहचान मिलना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार और उन युवाओं को दिया, जिन्होंने विभिन्न अवसरों पर उनका सहयोग किया।
मैथिल परिधान में समारोह में पहुंचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका कर्मक्षेत्र भले ही चंडीगढ़ हो, लेकिन उनकी आत्मा और संस्कार आज भी मिथिलांचल की मिट्टी से जुड़े हैं। राष्ट्रीय मंच पर पाग और धोती-कुर्ता पहनकर पहुंचना उनके लिए पूरी मैथिल संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर था।
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े-बड़े दावों से अधिक जरूरी छोटे-छोटे, ईमानदार और निरंतर प्रयास हैं। यदि युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग सामाजिक कार्यों और राष्ट्र निर्माण में करें, तो देश को नई दिशा और गति मिल सकती है।
चंडीगढ़ पहुंचने पर हुआ अभिनंदन
राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद चंडीगढ़ पहुंचने पर नीतीश कुमार सिंह को बधाई देने वालों का तांता लग गया। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे समाज सेवा और मैथिल संस्कृति के सम्मान से जुड़ी उपलब्धि बताया।
बधाई देने वालों में कर्नल (डॉ.) डीएन झा, LIB के चंडीगढ़-पंजाब समन्वयक डॉ. संतोष कुमार, पर्यावरणविद प्रभुनाथ शाही, विष्णुराज, अमित कुमार, पंकज झा, कृष्णदेव ‘विद्यार्थी’, रतन झा, ललित कुमार, रामसुफल यादव और सुनील कुमार सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
नीतीश कुमार सिंह को मिला यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर आगे बढ़ने की प्रेरक मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

















