डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर और ब्लड शुगर कम होने जैसी समस्याओं से रहें सतर्क, गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह को दें प्राथमिकता
चंडीगढ़, 29 अक्टूबर : गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इस दौरान शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, ताकि मां का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे और बच्चे का समुचित विकास हो सके। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को खानपान और शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कोकून हॉस्पिटल, चंडीगढ़ की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, डॉ. श्रुति कैंथ के अनुसार, गर्भावस्था में लंबे समय तक कुछ न खाने से ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। वहीं, पर्याप्त पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन की आशंका बढ़ जाती है। इसके कारण कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से डायबिटीज से पीड़ित या इंसुलिन लेने वाली गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
डॉ. श्रुति कैंथ ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हर महिला पर उपवास या लंबे समय तक भोजन-पानी से दूर रहने का असर एक जैसा नहीं होता। हालांकि, पहले से एनीमिया, हाई या लो ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, लगातार उल्टी अथवा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं में जोखिम अधिक हो सकता है। गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जी मिचलाने और उल्टी की समस्या होने पर खाली पेट रहने से परेशानी और बढ़ सकती है।
उन्होंने सलाह दी कि गर्भावस्था में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने का निर्णय लेने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। यदि इस दौरान चक्कर आने, घबराहट, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो उपवास जारी रखने के बजाय तुरंत भोजन-पानी लें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
डॉ. श्रुति कैंथ ने कहा कि गर्भावस्था में मां और बच्चे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी धार्मिक परंपरा या व्यक्तिगत आस्था का पालन करते समय अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझना और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है।

















