बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी बोले—एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाएगा
चंडीगढ़, 7 सितंबर : पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने अपनी स्थापना के 63 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर संस्थान के NINE ऑडिटोरियम में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में एआई चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा।
प्रो. चतुर्वेदी ने पीजीआईएमईआर को देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए कहा कि संस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं है। इसके बजाय यह डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने और अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करेगा। एआई बड़ी मात्रा में मेडिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक शोध का विश्लेषण कर डॉक्टरों तक जरूरी जानकारी तेजी से पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई अब केवल तकनीक या फैशन का विषय नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। भारत को दूसरे देशों के बनाए एआई सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरतों और भारतीय मरीजों की परिस्थितियों के अनुरूप एआई तकनीक विकसित करनी चाहिए।
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि आने वाले समय में एआई का इस्तेमाल दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, रेडियोलॉजी, अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सा संबंधी निर्णयों में तेजी लाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में भी केवल तथ्यों को याद करने के बजाय क्लिनिकल निर्णय, आलोचनात्मक सोच और मरीजों से बेहतर संवाद पर अधिक जोर देना होगा।
3 हजार बेड की क्षमता, लगातार घट रही वेटिंग लिस्ट
इस मौके पर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की उपलब्धियों और बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के शुरू होने से संस्थान की क्षमता में 800 बेड की बढ़ोतरी हुई है। पहले करीब 2,200 बेड थे, जो अब बढ़कर लगभग 3,000 हो गए हैं।
प्रो. लाल ने कहा कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद पीजीआईएमईआर की वेटिंग लिस्ट में कमी आ रही है। उन्होंने इसे संस्थान की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर का उद्देश्य आधुनिक और बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्हें मरीजों के लिए किफायती बनाए रखना है। आयुष्मान भारत योजना और अमृत फार्मेसी के माध्यम से मरीजों को इलाज और दवाओं में बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है।
प्रो. लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने संस्थान की प्रगति का श्रेय डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, कर्मचारियों और पूरे पीजीआईएमईआर परिवार की मेहनत को दिया।
35 कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के 35 कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन (अकादमिक्स) प्रो. संजय जैन और डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा ने कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए।
सम्मानित कर्मचारियों में अलेल सिंह नेगी, सुशील कुमार, भूराम सिंह, सते सिंह, प्रताप चंद, दुर्गा सिंह, किरण पाल, विनोद कुमार, धन सिंह, दीपक, सोनू, काली दास, राजिंदर सिंह, सुरिंदर कुमार, परमजीत सिंह, अशोक कुमार, रवजीत सिंह, ललिता अरोड़ा, अश्विनी कुमार, मनदीप सैनी, ओमिंदर कुमार, रजनी गुप्ता, रीता, ज्योति, मनप्रीत कौर, रजनी, राजेश, ललित चंद्र पंत, सचिन शर्मा, श्वेता, विवेक कुमार, सुरभि शर्मा, सौरभ शर्मा, अंबिका सैनी और आनंद यादव शामिल रहे।
समारोह में IMTECH चंडीगढ़ की निदेशक डॉ. अलका राव, पीजीआईएमईआर के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, डीन (अकादमिक्स) प्रो. संजय जैन, डीन (रिसर्च) प्रो. संजीव हांडा, चिकित्सा अधीक्षक-सह-प्रमुख अस्पताल प्रशासन प्रो. अशोक कुमार, वित्तीय सलाहकार रविंदर सिंह सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. संजीव हांडा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

















