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चंडीगढ़/ उद्योगों की राह आसान करने की पहल : लघु उद्योग भारती ने डिप्टी कमिश्नर के समक्ष उठाए चार अहम मुद्दे

चंडीगढ़, 24 अगस्त 2026: चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान को लेकर लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष अवी भसीन के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उद्योगों की मौजूदा जरूरतों से जुड़े चार प्रमुख मुद्दों का एजेंडा सौंपते हुए प्रशासन से इनके समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आग्रह किया।

यह मुलाकात पूर्व में हुई बैठकों और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के समक्ष उठाए गए औद्योगिक मुद्दों के फॉलो-अप के रूप में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में कई ऐसी गतिविधियां हैं, जिनके लिए पर्याप्त जगह और विशेष सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में मौजूदा औद्योगिक ढांचे को व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है।

उद्योग सहायक सेवाओं को मिले अनुमति

लघु उद्योग भारती ने औद्योगिक क्षेत्र में मिल स्टोर, स्टील, स्टेनलेस स्टील और एल्युमिनियम शीट सप्लायर, पाइप सप्लायर, हार्डवेयर, औद्योगिक उपकरण तथा अन्य आवश्यक उद्योग सहायक सेवाओं को अनुमति देने की मांग की। संगठन के अनुसार ऐसी सेवाएं स्थानीय उद्योगों की रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़ी हैं और इनके लिए औद्योगिक क्षेत्र अधिक उपयुक्त स्थान है।

स्थानीय निर्माताओं को फैक्ट्री आउटलेट की सुविधा

प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निर्माताओं को अपने स्वयं के निर्मित उत्पादों के प्रदर्शन और सीधे ग्राहकों को बिक्री के लिए फैक्ट्री आउटलेट संचालित करने की अनुमति देने का आग्रह किया। संगठन का कहना है कि इससे स्थानीय निर्माताओं को बाजार उपलब्ध होगा और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी मजबूती मिलेगी।

ऑटोमोबाइल इकाइयों को पूरी सेवा गतिविधियों की अनुमति

औद्योगिक क्षेत्र में ऑटोमोबाइल इकाइयों को वाहन मरम्मत, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स, वाहन एक्सेसरीज फिटिंग, व्हील एलाइनमेंट, डेंटिंग-पेंटिंग और अन्य संबद्ध सेवाओं की अनुमति देने की मांग भी रखी गई।

अवी भसीन ने कहा कि इन गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान, वाहनों की आवाजाही, मशीनरी और सामान की लोडिंग-अनलोडिंग की आवश्यकता होती है। सेक्टर मार्केट में सीमित जगह होने के कारण ऐसी गतिविधियों का संचालन मुश्किल होता है, जबकि औद्योगिक क्षेत्र इन सेवाओं के लिए अधिक उपयुक्त और नियोजित स्थान उपलब्ध करा सकता है।

अनअर्न्ड चार्जेज को तर्कसंगत बनाने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 1972 में 99 वर्ष की लीज पर आवंटित औद्योगिक प्लॉटों के संदर्भ में अनअर्न्ड चार्जेज को कम और तर्कसंगत करने की मांग भी उठाई। संगठन ने कहा कि इन प्लॉटों की लीज अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा हो चुका है। ऐसे में अनअर्न्ड चार्जेज को व्यावहारिक बनाने से उद्योगों से जुड़ी स्वामित्व और टाइटल संबंधी समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।

प्रशासन से विभागीय स्तर पर कार्रवाई का आग्रह

अवी भसीन ने कहा कि लघु उद्योग भारती द्वारा उठाए गए चारों मुद्दे चंडीगढ़ के मौजूदा उद्योगों की वास्तविक और व्यावहारिक जरूरतों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जिनमें स्थानीय परिस्थितियों और औद्योगिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी कमिश्नर से संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर इन मुद्दों को स्थानीय प्रशासन के स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

मुलाकात में लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवी भसीन के अलावा अक्षय चुघ, सुनील खेतरपाल और राम कुमार गर्ग शामिल रहे।

लघु उद्योग भारती ने विश्वास जताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग और डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव के मार्गदर्शन में औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों का व्यावहारिक और उद्योग हितैषी समाधान निकाला जाएगा।

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