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चंडीगढ़/ गतिविधि आधारित शिक्षा से गूंजा जीएमएमएस- 49डी, ‘ज्ञानोत्सव’ में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

पुनीत महाजन, चंडीगढ़

चंडीगढ़, 9 अक्टूबर : विद्यार्थियों में सीखने की ललक जगाने, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने और शिक्षा को रोचक बनाने के उद्देश्य से गवर्नमेंट मॉडल मिडिल स्कूल (जीएमएमएस), सेक्टर-49डी में ‘ज्ञानोत्सव’ के तहत शैक्षणिक मेले का आयोजन किया गया। मुख्य शिक्षक रवि शंकर की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में बाल मेला, रीडिंग मेला और भाषा उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन में गतिविधियों के जरिए सीखने और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर रहा।

कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन निर्मल शर्मा, समग्र शिक्षा की पेडागॉजी कोऑर्डिनेटर कोमल शर्मा, जीएमएसएसएस-46डी की प्रिंसिपल प्रीति सूद, जीएमएचएस-49 की हेडमिस्ट्रेस मीनाक्षी सोनी, जीएमएचएस-32 की हेडमिस्ट्रेस रूबी, जीएमएचएस-46 की इंचार्ज शालू गुलाटी, वार्ड नंबर-35 के पार्षद राजिंदर शर्मा, भारत विकास परिषद के हरजिंदर सिंह और सीआरसीसी सुमन नारंग की उपस्थिति रही।

खेल-खेल में सीखने और प्रयोग करने का मिला अवसर

ज्ञानोत्सव के बाल मेले में विद्यार्थियों को विभिन्न रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिला। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में कल्पनाशक्ति, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और आत्मविश्वास जैसे गुणों को विकसित करना रहा। गतिविधियों ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचानने और सीखी गई बातों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।

रीडिंग मेले ने पुस्तकों से जुड़ने का दिया संदेश

रीडिंग मेले के जरिए विद्यार्थियों में पुस्तकें पढ़ने की रुचि विकसित करने और नियमित पठन की आदत को प्रोत्साहित किया गया। पढ़ने की समझ, शब्दावली और कल्पनाशक्ति को मजबूत बनाने के साथ बच्चों को यह संदेश दिया गया कि पठन केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण साधन भी है।

भाषा उत्सव में अभिव्यक्ति कौशल को मिला प्रोत्साहन

भाषा उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमताओं को निखारने पर ध्यान केंद्रित किया गया। भाषा आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपने विचार स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया गया। इससे संवाद कौशल और प्रभावी अभिव्यक्ति के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों की सहभागिता ने गतिविधि आधारित, आनंदमय और समावेशी शिक्षा की उपयोगिता को सामने रखा। ज्ञानोत्सव ने यह संदेश दिया कि बच्चों की शिक्षा को केवल कक्षा और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय अनुभवों, रचनात्मक गतिविधियों और सहभागिता से जोड़ना आवश्यक है।

मुख्य शिक्षक रवि शंकर की देखरेख में आयोजित इस शैक्षणिक मेले ने विद्यालय में सीखने के नए तरीकों को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास की दिशा में सार्थक पहल प्रस्तुत की।

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