चंडीगढ़, 31 जुलाई : टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञों ने कहा है कि चयनित मरीजों में मेटाबोलिक सर्जरी लंबे समय तक डायबिटीज को नियंत्रित करने और कई मामलों में रिमिशन (बीमारी के लक्षणों का लंबे समय तक समाप्त रहना) हासिल करने का प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपचार विकल्प बनकर उभरी है।
पार्क हॉस्पिटल मोहाली द्वारा चंडीगढ़ प्रेस क्लब में वीरवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बैरियाट्रिक एवं मेटाबोलिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अमित गर्ग और एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नीरज गर्ग ने कहा कि भारत में डायबिटीज तेजी से सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बनती जा रही है। वर्तमान में देश में 10 करोड़ से अधिक लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक अवस्था में हैं।
डॉ. अमित गर्ग ने कहा कि अनियंत्रित डायबिटीज केवल रक्त में शुगर का स्तर बढ़ाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे हृदयाघात, स्ट्रोक, किडनी फेल होना, आंखों की रोशनी प्रभावित होना, नसों को नुकसान, डायबिटिक फुट, अंग काटने की नौबत, फैटी लीवर और बार-बार संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक उपचार मुख्य रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है, जबकि मेटाबोलिक सर्जरी शरीर में होने वाले हार्मोनल और मेटाबोलिक बदलावों पर काम करती है। इसके कारण योग्य मरीजों में लंबे समय तक डायबिटीज से राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं का जोखिम भी कम हो सकता है।
डॉ. नीरज गर्ग ने कहा कि देश में हर चार वयस्कों में से एक व्यक्ति या तो डायबिटीज से ग्रस्त है या प्री-डायबिटिक अवस्था में है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित आहार अपनाने, शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन मरीजों को डायबिटीज हुए अपेक्षाकृत कम समय हुआ है और जिनके अग्न्याशय (पैनक्रियाज) की कार्यक्षमता अभी सुरक्षित है, उनमें मेटाबोलिक सर्जरी के बाद लंबे समय तक डायबिटीज रिमिशन की संभावना अधिक रहती है। इसलिए शुरुआती चरण में ही सही उपचार का चयन करना महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर पार्क हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ (नॉर्थ) आशीष चड्ढा ने बताया कि अस्पताल विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सरकारों के अलावा कई प्रमुख बीमा कंपनियों, टीपीए और कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ एम्पैनल्ड है।

















