चंडीगढ़, 14 सितंबर 2026: मरीजों को अस्पताल की व्यवस्थाओं को समझने और सही जगह तक पहुंचने में मदद करने की दिशा में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रोजेक्ट सारथी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन (NPSC) 2026 में प्रोजेक्ट सारथी को मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ‘आउटस्टैंडिंग बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सम्मानित किया गया।
यह सम्मेलन 11 और 12 सितंबर को एम्स नागपुर ने राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सचिवालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के सहयोग से आयोजित किया था। सम्मेलन के दौरान पीजीआईएमईआर को ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज इन पेशेंट सेफ्टी 2026’ के लिए विशेष सम्मान भी प्रदान किया गया।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि प्रोजेक्ट सारथी पीजीआईएमईआर के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सहानुभूति, स्वयंसेवा और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों के लिए अधिक सरल और मानवीय बनाया जा सकता है। मरीज को सही दिशा बताना, उसकी बात सुनना और जरूरत के समय मदद करना उसके अस्पताल अनुभव में बड़ा बदलाव ला सकता है।
पीजीआईएमईआर के डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) पंकज राय ने कहा कि सारथी ने दिखाया है कि एक व्यवस्थित स्वयंसेवी कार्यक्रम मरीजों के अनुभव और अस्पताल की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सारथी मरीजों को अस्पताल की विभिन्न सेवाओं तक पहुंचने में मदद करते हैं, जिससे मरीजों की आवाजाही आसान होती है और अस्पताल की सेवाओं का बेहतर उपयोग हो पाता है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में पीजीआईएमईआर की ओर से सरयू डी. मद्रा, कंसल्टेंट (IEC/Media), ROTTO North cum PRO ने प्रोजेक्ट सारथी की प्रस्तुति दी। उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली, प्रभाव, उपलब्धियों और दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में इसे लागू किए जाने की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पीजीआईएमईआर की ओर से सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त किया।
2024 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट SARATHI (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) की शुरुआत मई 2024 में हुई थी। इसके तहत प्रशिक्षित छात्र स्वयंसेवक अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की मदद करते हैं। खासतौर पर ऐसे मरीजों को सहायता दी जाती है, जिन्हें अस्पताल की व्यवस्था की जानकारी नहीं होती।
सारथी स्वयंसेवक मरीजों को ओपीडी में जाने, पंजीकरण, विभिन्न सेवाओं के स्थान, कतार, जांच, रिपोर्ट और अन्य गैर-चिकित्सकीय जरूरतों के संबंध में मार्गदर्शन देते हैं। इससे मरीजों को सही सेवा तक पहुंचने में आसानी होती है और अनावश्यक भ्रम व इंतजार कम करने में मदद मिलती है।
पीजीआईएमईआर में हर साल 30 लाख से अधिक ओपीडी मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में सारथी कार्यक्रम एक बड़े मरीज सहायता मॉडल के रूप में विकसित हुआ है। अब तक 2,700 से अधिक छात्र सारथी स्वयंसेवक के रूप में जुड़ चुके हैं और उन्होंने 1.6 लाख घंटे से अधिक सेवा दी है। इस पहल के माध्यम से लाखों मरीजों और उनके परिजनों को सहायता मिली है।
प्रोजेक्ट सारथी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप छात्रों में व्यावहारिक सीख, सामाजिक भागीदारी और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है। इस पहल ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सही जानकारी, आसान पहुंच, उचित मार्गदर्शन और संवेदनशील व्यवहार भी सुरक्षित एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

















