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चंडीगढ़/ प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विनोद कुमार शर्मा के साहित्य पर होगा पीएच.डी. शोध : बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय ने दी स्वीकृति

चंडीगढ़/रोहतक : हिन्दी साहित्य जगत के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद्, पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. विनोद कुमार शर्मा के साहित्य पर अब विश्वविद्यालय स्तर पर शोध किया जाएगा। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर (रोहतक) के हिन्दी विभाग की डॉक्टोरल रिसर्च कमेटी (डीआरसी) ने शोधार्थी विनीत के पीएच.डी. शोध विषय “डॉ. विनोद कुमार शर्मा के साहित्य में वैश्विक मूल्य” को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

विश्वविद्यालय की औपचारिक स्वीकृति के बाद जारी आदेश के अनुसार यह शोध कार्य हिन्दी विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) बाबू राम के निर्देशन में सम्पन्न होगा। यह विषय 7 मई 2026 को आयोजित डीआरसी की बैठक में अनुमोदित किया गया था।

प्रो. (डॉ.) बाबू राम का मानना है कि डॉ. विनोद कुमार शर्मा के साहित्य में भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्य, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभावना तथा वैश्विक बंधुत्व का व्यापक दृष्टिकोण दिखाई देता है। यह शोध इन सभी आयामों का गंभीर अकादमिक अध्ययन प्रस्तुत करेगा और हिन्दी साहित्य में वैश्विक मूल्यों पर नई बहस को आगे बढ़ाएगा।

डॉ. विनोद कुमार शर्मा शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनकी अनेक साहित्यिक कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और शोधार्थियों ने व्यापक रूप से सराहा है। उनके लेखन में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ विश्व मानवता, शांति, सह-अस्तित्व और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना प्रमुख रूप से परिलक्षित होती है।

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबू राम (डी.लिट.) ने शोध विषय की स्वीकृति से संबंधित पत्र एक सादे समारोह में डॉ. विनोद कुमार शर्मा को सौंपा। इस अवसर पर डॉ. मधुकांत, जय भगवान सिंगला, प्रेम विज, अशोक भण्डारी ‘नादिर’, डॉ. अंजना रानी गर्ग, गणेश दत्त, आर.के. भगत, डॉ. संतोष गर्ग तथा डॉ. संगीता कुंद्रा ‘गीत’ सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

वर्तमान में डॉ. विनोद कुमार शर्मा अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पंचकूला इकाई के अध्यक्ष तथा संवाद साहित्य मंच के उपाध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके साहित्य पर पीएच.डी. शोध विषय की स्वीकृति को हिन्दी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस अवसर पर रवींद्र तलवाड़, संतोष गर्ग, डॉ. सरिता मेहता, आशीष शर्मा, सुषमा मल्होत्रा, डॉ. कुलभूषण शर्मा, वी.बी. कपिल सहित देश-विदेश के अनेक साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों एवं शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने डॉ. विनोद कुमार शर्मा को शुभकामनाएं दीं।

साहित्यकारों का मानना है कि यह शोध न केवल डॉ. विनोद कुमार शर्मा के साहित्यिक योगदान का व्यापक मूल्यांकन करेगा, बल्कि हिन्दी साहित्य में निहित वैश्विक मानवीय मूल्यों के अध्ययन और प्रसार को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

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