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चंडीगढ़/ भारत-ऑस्ट्रेलिया कारोबार को नई दिशा देने पर हुआ मंथन, रणनीतिक रिश्तों को व्यावसायिक साझेदारी में बदलने पर जोर

चंडीगढ़ : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों को अब ठोस कारोबारी साझेदारियों में बदलने की दिशा में कदम तेज किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से चंडीगढ़ स्थित भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नॉर्दर्न रीजन मुख्यालय में सीआईआई-ऑस्ट्रेलिया इंडिया बिजनेस काउंसिल (एआईबीसी) नॉर्थ इंडिया बूट कैंप का आयोजन किया गया। इसमें दोनों देशों के सरकार, उद्योग, व्यापार एवं निवेश जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लेकर निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

बूट कैंप में सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के चेयरपर्सन एवं सैमटेल एवियोनिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड सीईओ पुनीत कौरा, भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ओ.ए.एम. तथा चंडीगढ़ के सांसद एवं इंडिया-ऑस्ट्रेलिया पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप के चेयरपर्सन मनीष तिवारी समेत दोनों देशों के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक संबंधों को अब बिजनेस-टू-बिजनेस साझेदारी, निवेश और संयुक्त परियोजनाओं का रूप दिया जाए। इसके लिए दोनों देशों की आर्थिक और औद्योगिक क्षमताओं को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत रेखांकित की गई।

क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर नजर

चर्चा में क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी को भविष्य के महत्वपूर्ण सहयोग क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण को तेजी से बढ़ा रहा है, जिसके लिए महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविध आपूर्ति जरूरी है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधन, पूंजी और तकनीकी क्षमताएं भारत के बड़े बाजार और तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र के साथ महत्वपूर्ण तालमेल बना सकती हैं।

भारत की इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी की क्षमताओं तथा ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधन, कृषि, अनुसंधान, तकनीक और पूंजी क्षेत्र की विशेषज्ञता को मिलाकर संयुक्त कारोबारी अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

पंजाब-हरियाणा के उद्योगों के लिए भी बड़े अवसर

बूट कैंप में उत्तर भारत की औद्योगिक क्षमता को भी भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापारिक सहयोग के महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा गया। पंजाब में एग्रीटेक, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, जल दक्षता, कोल्ड चेन और टेक्सटाइल्स जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं, लुधियाना के मजबूत इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग आधार को भी संभावित कारोबारी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

इसी तरह हरियाणा के ऑटोमोटिव, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, आईटी और सर्विस सेक्टर ऑस्ट्रेलिया के साथ टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी, डिजिटलीकरण और सप्लाई चेन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

बैठक में ऑस्ट्रेलिया के राज्यों और भारत के बीच बढ़ते संपर्कों को भी सकारात्मक संकेत बताया गया। न्यू साउथ वेल्स के पहले भारत व्यापार मिशन के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, पर्यटन, शिक्षा और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशे जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया के राज्य और क्षेत्र भी भारत को तेजी से महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं।

संवाद से आगे बढ़कर जमीन पर दिखे कारोबारी नतीजे

बूट कैंप में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सरकारी एवं संस्थागत स्तर पर बने मजबूत संबंधों का लाभ अब उद्योग जगत तक तेजी से पहुंचना चाहिए। संवाद से सहभागिता, सहभागिता से साझेदारी और साझेदारी से ठोस कारोबारी परिणाम हासिल करने की दिशा में उद्योगों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ाना जरूरी है।

सीआईआई-एआईबीसी नॉर्थ इंडिया बूट कैंप को इसी दिशा में महत्वपूर्ण मंच बताया गया, जो भारत और ऑस्ट्रेलिया के उद्योगों को एक-दूसरे के करीब लाकर निवेश, तकनीक, संयुक्त उद्यम और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारी के नए रास्ते खोल सकता है।

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