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लखीमपुर/ चित्रगुप्त मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर कलम-दवात चौराहा बना काव्य साधना का केंद्र, ओज से हास्य और श्रृंगार तक बिखरे भावों के रंग

आस्था के आंगन में गूंजे कविता के स्वर, ‘अक्षर अर्पण’ ने रचा साहित्य और संस्कार का अनूठा संगम

लखीमपुर खीरी, 05 अक्टूबर 2026 : कलम और दवात की प्रतीकात्मक धरती पर जब कविता ने दस्तक दी तो आस्था का वातावरण साहित्यिक संवेदनाओं से भर उठा। श्री दुर्गे चित्रगुप्त मंदिर, शाहपुरा कोठी में भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित भव्य काव्य संध्या ‘अक्षर अर्पण’ ने धर्म, साहित्य और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर ला दिया।

कलम-दवात चौराहे पर सजी इस विशेष काव्य संध्या में देश-प्रदेश के रचनाकारों ने अपनी कविताओं के जरिए श्रोताओं को कभी ओज और राष्ट्रभावना से जोड़ा, तो कभी हास्य-व्यंग्य की फुहार से गुदगुदाया। गीतों की मधुरता, श्रृंगार की कोमलता और सामाजिक संवेदनाओं की गंभीरता ने शाम को यादगार बना दिया।

ओज कवि कुलदीप समर के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का मंच संचालन देश के चर्चित मंच संचालक नीरज पांडेय ने काव्यात्मक अंदाज में किया। उनके प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम की लय को बनाए रखा और श्रोताओं को अंत तक जोड़े रखा।

हरदोई के अजीत शुक्ला ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को ठहाकों से सराबोर किया। उदयराज सिंह ने अपने गीतों से भावनाओं को स्वर दिया, जबकि हास्य कवि विशेष शर्मा ने अपनी रचनाओं से माहौल को हल्का-फुल्का और जीवंत बनाए रखा। जे.बी. गंज के सुनीत बाजपेयी ने गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। वहीं ओज एवं श्रृंगार की कवयित्री कृति श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं के माध्यम से काव्य के विविध रंगों को सामने रखा।

कार्यक्रम के संयोजक कुलदीप समर के ओजपूर्ण काव्य पाठ ने वातावरण में जोश और ऊर्जा भर दी। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक सराहना की।

काव्य संध्या में शामिल सभी रचनाकारों को सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर दैनिक जनजागरण न्यूज डिजिटल के पंचम स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में संस्थापक अनिल श्रीवास्तव ने ओज कवि कुलदीप समर को ‘जनजागरण अधिरथ सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान साहित्य और पत्रकारिता के उस रिश्ते को रेखांकित करता है, जिसमें शब्द मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज में जागरूकता और सकारात्मक चेतना पैदा करने का माध्यम बनते हैं।

हवन से शुरू हुआ दिन, कविता पर हुआ समापन

इस साहित्यिक आयोजन से पहले शाम पांच बजे श्री दुर्गे चित्रगुप्त मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मां दुर्गा और भगवान चित्रगुप्त की आराधना के साथ विशाल हवन, भजन एवं कीर्तन का आयोजन किया गया। मनीष श्रीवास्तव सपत्नीक तथा विजय-रीना अस्थाना ने यजमान के रूप में हवन अनुष्ठान संपन्न कराया।

धार्मिक अनुष्ठानों से शुरू हुई शाम जब काव्य के मंच तक पहुंची तो पूरा आयोजन आस्था से साहित्य तक की एक खूबसूरत यात्रा बन गया। ‘अक्षर अर्पण’ का मूल भाव भी यही रहा कि जिस कलम से कर्मों का लेखा लिखा जाता है, वही कलम जब कविता बनती है तो समाज की संवेदनाओं और विचारों को आवाज देती है।

कार्यक्रम के समापन पर श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा लखीमपुर खीरी के अध्यक्ष चित्रांश अनूप सिंह ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद अध्यक्षा डॉ. इरा श्रीवास्तव, संरक्षक राजीव रत्न खरे, डॉ. ओ.पी. श्रीवास्तव, शशिकांत श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव एडवोकेट, प्रसिद्ध कवि ज्ञान प्रकाश ‘आकुल’, राकेश श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव जुग्गी, विकास श्रीवास्तव, रविकांत श्रीवास्तव, डॉ. अंकित श्रीवास्तव, महिला अध्यक्ष अनीता निगम, लक्ष्मी निगम, शिप्रा श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव सपत्नीक, मुकेश सक्सेना, अजय सक्सेना, लोकेंद्र श्रीवास्तव, ज्ञानेन्द्र सक्सेना, राकेश श्रीवास्तव, इंजी. दुर्गेश वर्मा, सुधाकर लाला, प्रशांत लाला, संजय श्रीवास्तव, नीरज सक्सेना, इंजीनियर राजेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

‘अक्षर अर्पण’ ने यह संदेश दिया कि आस्था जब साहित्य से मिलती है तो शब्द महज शब्द नहीं रहते—वे संस्कार, संवेदना और समाज की चेतना की आवाज बन जाते हैं।

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