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चंडीगढ़/ स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में चितकारा इंटरनेशनल स्कूल का राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन

देश में पांचवां, चंडीगढ़-हरियाणा-पंजाब में रहा नंबर वन

चंडीगढ़, 3 जुलाई : पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए चितकारा इंटरनेशनल स्कूल ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26” में स्कूल को देशभर में पांचवां तथा चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में पहला स्थान मिला है।

यह रेटिंग विद्यालयों में स्वच्छता, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण शिक्षा, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास से जुड़े प्रयासों के आधार पर प्रदान की जाती है। चितकारा इंटरनेशनल स्कूल ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चितकारा इंटरनेशनल स्कूल्स की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. नियति चितकारा ने कहा कि विद्यालय में शिक्षा के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को समान महत्व दिया जाता है। उनका कहना था कि विद्यार्थियों में बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने इस सम्मान का श्रेय विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

विद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण को अपनी शैक्षणिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया है। चितकारा यूनिवर्सिटी के सहयोग से विद्यार्थियों को पर्यावरण और नई तकनीकों से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। स्कूल का सस्टेनेबिलिटी सेंटर नवाचार और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मूल्यांकन के दौरान विद्यालय में वर्षा जल संचयन, जल गुणवत्ता की नियमित जांच, स्वच्छ एवं सुलभ शौचालय, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, जल संरक्षण तकनीकों तथा सक्रिय ईको क्लब गतिविधियों को विशेष रूप से सराहा गया। इसके अलावा परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण, गैर-जैविक कचरे का सुरक्षित निपटान, न्यूट्रिशन एवं हर्बल गार्डन, जल ऑडिट, पौधारोपण अभियान और मिशन लाइफ जैसी गतिविधियों ने भी विद्यालय को उच्च रेटिंग दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण उनके लिए केवल एक अभियान नहीं, बल्कि दैनिक कार्यसंस्कृति का हिस्सा है। यही सोच विद्यार्थियों में जिम्मेदारी, अनुशासन और सतत विकास के प्रति जागरूकता विकसित कर रही है, जिससे वे भविष्य के बेहतर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

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