परिवार ने दुःख की घड़ी में लिया अंगदान का साहसिक निर्णय, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को पहुंचाया गया अस्पतालों तक
चंडीगढ़, 14 सितंबर 2026 : गहरे व्यक्तिगत दुःख के बीच एक परिवार ने मानवता और करुणा की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का निर्णय लेकर छह जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने का रास्ता खोल दिया। 30 वर्षीय संजू गुर्जर, भारतीय सेना में सेवारत एक सैनिक की पत्नी और पूर्व सैनिक की बेटी थीं।
8 सितंबर 2026 को मस्तिष्क में रक्तस्राव के बाद उन्हें कमांड अस्पताल, पश्चिमी कमान, चंडीमंदिर में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया। इस बेहद कठिन और भावनात्मक परिस्थिति में परिवार ने असाधारण साहस दिखाते हुए उनके अंगदान की सहमति दी।
कमांड अस्पताल, पश्चिमी कमान के साथ सर्विस एवं सिविल अस्पतालों की विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों ने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTO) और राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) के समन्वय से पूरी रात कार्य करते हुए अंगों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया और उन्हें संबंधित चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
संजू गुर्जर का लिवर आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली, जबकि हृदय फोर्टिस अस्पताल, नोएडा भेजा गया। एक गुर्दा पीजीआई, रोहतक को आवंटित किया गया। वहीं दूसरा गुर्दा और दोनों कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए कमांड अस्पताल, पश्चिमी कमान में सुरक्षित रखे गए।
अंगों को निर्धारित अस्पतालों तक समय पर पहुंचाने के लिए मुख्यालय पश्चिमी कमान के समन्वय से सैन्य पुलिस, नागरिक प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने कई ग्रीन कॉरिडोर बनाए। इन त्वरित परिवहन व्यवस्थाओं ने महत्वपूर्ण अंगों को कम से कम समय में संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
संजू गुर्जर के परिवार का यह निर्णय न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की उस गौरवशाली परंपरा को दर्शाता है, जिसमें स्वयं से पहले मानवता को प्राथमिकता दी जाती है, बल्कि यह करुणा, निःस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण का भी प्रेरणादायक उदाहरण है।
एक परिवार ने अपने अपार दुःख को मानव सेवा में बदलते हुए यह संदेश दिया कि एक व्यक्ति के अंगदान से कई जिंदगियों में उम्मीद की नई किरण जगाई जा सकती है।

















