परमात्मा का एहसास ही मन को भक्ति, प्रेम और समर्पण से सराबोर करता है : निरंकारी राजपिता रमित जी
चंडीगढ़, 13 सितंबर 2026: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद से चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित मेला ग्राउंड में विशाल निरंकारी संत समागम आयोजित किया गया। भारी बरसात के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समागम में पहुंचे। बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह, श्रद्धा और भक्ति को कम नहीं कर सकी। इस अवसर पर निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन वचनों का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
समागम के दौरान संतों ने गीतों, भजनों और विचारों के माध्यम से सतगुरु की शिक्षाओं को साझा किया। इससे पूरा वातावरण प्रेम, भक्ति और श्रद्धा के भाव से ओत-प्रोत हो गया।
निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य माया, धन-दौलत और शोहरत की चकाचौंध में खो जाना नहीं, बल्कि परमात्मा की पहचान करना है। सतगुरु द्वारा प्रदान किया गया ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराते हुए परमात्मा के साथ उसके संबंध का एहसास कराता है।
उन्होंने कहा कि संसार के आकर्षणों में उलझकर मनुष्य कई बार अपने जीवन के मूल उद्देश्य को भूल जाता है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जब मनुष्य को यह एहसास होता है कि वह परमात्मा का अंश है, तो उसके जीवन को सही दिशा मिलती है और भक्ति को वास्तविक भाव प्राप्त होता है।
भारी बरसात का आध्यात्मिक संदर्भ देते हुए निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो आज बरसात भी संतों के प्रेम और भक्ति में शामिल होने आई हो। जिस प्रकार संत वर्षा में भीग रहे हैं, उसी प्रकार सभी संत परमात्मा के एहसास, भक्ति और सतगुरु के प्रेम में सदैव भीगे रहें।
समागम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के जीवन में प्रेम, भक्ति और परमात्मा का एहसास निरंतर बनाए रखने की प्रार्थना की गई। साथ ही, निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में आयोजित होने वाले वार्षिक संत समागम में श्रद्धालुओं से बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया।

















