भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के पर्व पर साहित्य का अनूठा उपहार, 70 कविताओं का संग्रह पाठकों को समर्पित
बथनाहा (अररिया) : भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट रिश्ते के प्रतीक रक्षाबंधन के पावन अवसर पर वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ की काव्य कृति ‘मुट्ठी भर अनाज’ का विश्वव्यापी विमोचन किया गया। Spark Venue Publishing द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक को रक्षाबंधन के दिन रिलीज किया गया। इस अवसर पर पुस्तक को साहित्यप्रेमियों और पाठकों के लिए एक विशेष साहित्यिक उपहार के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कोशी शिविर, बथनाहा, जिला अररिया (बिहार) निवासी वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ की इस काव्य कृति में कुल 70 कविताओं को स्थान दिया गया है। पुस्तक में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार, भारतीय संस्कृति, योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, साहित्य, किसान एवं कृषि, जीवन-दर्शन, मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक विषयों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई है।
रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व पर पुस्तक का विमोचन अपने आप में विशेष महत्व रखता है। जिस दिन देशभर में भाई-बहन प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर को मजबूत करने का पर्व मना रहे थे, उसी दिन ‘मुट्ठी भर अनाज’ के रूप में साहित्य और संवेदनाओं से जुड़ी रचनाओं को पाठकों के बीच पहुंचाया गया। इस दृष्टि से पुस्तक का विमोचन साहित्य और सामाजिक भावनाओं का सुंदर संगम माना जा रहा है।
शुभकामनाओं और संदेशों से शुरू होती है कृति
पुस्तक की शुरुआत साहित्यिक व्यक्तित्वों एवं शुभचिंतकों के संदेशों से होती है। इसमें साहित्य शिरोमणि विद्यानन्द प्र. व्याहुत की शुभकामनाएं, कन्हैया कुमार दास के ‘दो शब्द मेरी कलम से’, वरिष्ठ साहित्य प्रेमी विनोद कुमार तिवारी की मंगल कामना तथा स्वयं काव्य शिरोमणि वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ की ‘अंतर मन की बात’ शामिल है।
इसके अतिरिक्त ई. रूद्र नारायण लाल, सेवानिवृत्त पदाधिकारी, सिंचाई विभाग, बिहार की ओर से भी पुस्तक के लिए शुभ संदेश दिया गया है।
70 कविताओं में राष्ट्र से लेकर समाज और जीवन तक
‘मुट्ठी भर अनाज’ में शामिल रचनाओं में विषयों की व्यापक विविधता देखने को मिलती है। ‘बगीचा की सुगंध’, ‘कर्म कभी छूटे नहीं’, ‘जयमाला का हार’, ‘करें योगा, रहें स्वस्थ’, ‘कारगिल युद्ध’, ‘मुट्ठी भर अनाज’, ‘हर घर तिरंगा’, ‘भगवती मंदिर, बथनाहा’, ‘गहराई को समझना होगा’, ‘करुआ सच’ जैसी कविताएं अलग-अलग सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को सामने रखती हैं।
वहीं ‘हिंदी राष्ट्र भाषा घोषित हो’, ‘विजयादशमी’, ‘भारत योग का हब बनेगा’, ‘माननीया द्रौपदी मुर्मू पर दो शब्द’, ‘कोई भारत को छू कर देखो’, ‘बापू गांधी और शास्त्री’, ‘भारत सुरक्षित है’, ‘संविधान पर दो शब्द’ जैसी रचनाओं में राष्ट्र, संस्कृति और देशभक्ति के स्वर प्रमुखता से उभरते हैं।
कवि ने सामाजिक एवं समकालीन विषयों को भी अपनी लेखनी का हिस्सा बनाया है। ‘चालू हो पुरानी पेंशन’, ‘बिहार का विकास कब होगा’, ‘खाद पर निर्भरता’, ‘समस्या ही समस्या’, ‘पुस्तकों की अभिलाषा’, ‘आत्मविश्वास प्रबल है’, ‘हिम्मत हारे नहीं’, ‘धैर्य रखना’, ‘ज्ञान बिना अंधकार हटे नहीं’ जैसी कविताएं समाज के विभिन्न सवालों और जीवन-मूल्यों पर केंद्रित हैं।
आम जीवन की भाषा में संदेश देने का प्रयास
वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ ने अपनी रचनाओं में आम आदमी के जीवन से जुड़े विषयों को सरल भाषा में उठाने का प्रयास किया है। उनकी कविताओं में जहां देश, समाज और संस्कृति के प्रति चिंता दिखाई देती है, वहीं योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, साहित्य, किसान और मानवीय मूल्यों जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आते हैं।
पुस्तक में अनुसूची तथा लेखक का परिचय भी शामिल किया गया है। इससे पाठकों को पुस्तक की विषय-वस्तु और रचनाकार की साहित्यिक पृष्ठभूमि को समझने में सुविधा होगी।
प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध
Spark Venue Publishing के माध्यम से प्रकाशित ‘मुट्ठी भर अनाज’ को विश्वभर के पाठकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। पुस्तक Amazon, Flipkart, Kindle, Kobo, Google Books और Google Play जैसे प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध कराई गई है।
रक्षाबंधन के दिन हुए इस विश्वव्यापी विमोचन को लेकर साहित्यप्रेमियों में उत्साह है। वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ की यह कृति अररिया-बथनाहा की साहित्यिक प्रतिभा को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

















