जल संरक्षण से सुरक्षित पेयजल तक छात्रों को किया जागरूक, सिंगल-यूज प्लास्टिक कम करने पर जोर
चंडीगढ़, 3 सितंबर : जल संरक्षण और बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को लेकर स्वच्छ पानी ने सेंट जेवियर्स स्कूल में विशेष जागरूकता सत्र आयोजित कर छात्रों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल के महत्व से अवगत कराया। सत्र में छात्रों को बताया गया कि पानी की गुणवत्ता, जल स्रोतों की सुरक्षा और प्लास्टिक प्रदूषण से निपटना आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
संवादात्मक गतिविधियों और चर्चाओं के माध्यम से छात्रों ने जाना कि पानी की गुणवत्ता का आकलन कैसे किया जाता है और पैकेजिंग, प्लास्टिक कचरे तथा सिंथेटिक उत्पादों से निकलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक कण किस प्रकार जल स्रोतों तक पहुंच सकते हैं। छात्रों से अनावश्यक प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर स्वच्छ पानी के संस्थापक निशांत भट्ट ने कहा कि जिम्मेदारी के साथ पानी का उपयोग समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को जागरूक कर उन्हें अपने घरों, स्कूलों और समाज में बदलाव का वाहक बनाया जा सकता है।
स्वच्छ पानी ने ट्राइसिटी के होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग (HoReCa) क्षेत्र के लिए पुन: उपयोग योग्य और पुनर्चक्रण योग्य पानी की बोतलों का टिकाऊ इकोसिस्टम विकसित करने के अपने विजन की भी जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक बोतलों पर निर्भरता घटाना और पानी के उपभोग को अधिक टिकाऊ बनाना है।
सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रशासन प्रमुख एंड्रयू हेक्टर रॉय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में जल संरक्षण, स्थिरता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
सत्र के दौरान छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह संकल्प लिया कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव कर वे स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

















