• Home
  • चंडीगढ़
  • चंडीगढ़/ 82% भारतीयों ने कभी न कभी गिराया स्मार्टफोन, सिर्फ 6–8% के पास सक्रिय प्रोटेक्शन प्लान
Image

चंडीगढ़/ 82% भारतीयों ने कभी न कभी गिराया स्मार्टफोन, सिर्फ 6–8% के पास सक्रिय प्रोटेक्शन प्लान

सोहन रावत, चंडीगढ़

चंडीगढ़, 19 अगस्त 2026 : स्मार्टफोन भारतीयों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं में अभी भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। वनअसिस्ट और वैश्विक बाजार अनुसंधान संस्था हंसा रिसर्च के संयुक्त अध्ययन “द ग्रेट इंडियन स्मार्टफोन प्रोटेक्शन क्राइसिस” के अनुसार, देश में 82 प्रतिशत स्मार्टफोन उपयोगकर्ता कम से कम एक बार अपना फोन गलती से गिरा चुके हैं, जबकि 72 प्रतिशत लोगों के फोन को दुर्घटना के कारण नुकसान भी पहुंच चुका है। इसके बावजूद वर्तमान समय में केवल 6 से 8 प्रतिशत उपभोक्ता ही सक्रिय स्मार्टफोन प्रोटेक्शन प्लान का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अध्ययन के मुताबिक स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल, उपकरणों की बढ़ती कीमत और उन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति ने फोन की सुरक्षा को एक गंभीर उपभोक्ता मुद्दा बना दिया है। फोन गिरने और स्क्रीन टूटने जैसी घटनाएं नुकसान के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। खास बात यह है कि 36 प्रतिशत आकस्मिक नुकसान की घटनाएं फोन के जेब या बैग से गिरने के कारण होती हैं।

फोन गिरने से सिर्फ आर्थिक नहीं, भावनात्मक नुकसान भी

स्मार्टफोन के दुर्घटनाग्रस्त होने का असर केवल मरम्मत के खर्च तक सीमित नहीं है। अध्ययन में शामिल 35 प्रतिशत भारतीयों ने बताया कि फोन गिरने के तुरंत बाद उन्हें घबराहट महसूस हुई। 24 प्रतिशत लोगों का इस घटना को लेकर किसी से विवाद हुआ, जबकि 15 प्रतिशत लोगों ने फोन खराब होने के कारण अपनी योजनाएं तक रद्द कर दीं।

महिलाओं में फोन गिरने के बाद भावनात्मक प्रतिक्रिया पुरुषों की तुलना में अधिक देखी गई। जहां 43 प्रतिशत महिलाओं ने फोन गिरने के बाद घबराने की बात कही, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत रहा।

महिलाओं में स्मार्टफोन पर निर्भरता और जोखिम दोनों अधिक

अध्ययन में महिला और पुरुष स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के व्यवहार में भी उल्लेखनीय अंतर सामने आया। 79 प्रतिशत महिलाएं सोशल मीडिया के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 69 प्रतिशत है।

इसी तरह, 94 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनका फोन कभी न कभी गलती से गिर चुका है। पुरुषों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत रहा। 79 प्रतिशत महिलाओं के फोन को दुर्घटनावश नुकसान पहुंचा, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 71 प्रतिशत था।

अध्ययन के अनुसार, महिलाओं के फोन को होने वाले नुकसान में घरेलू परिस्थितियों की भूमिका भी अधिक रही। बच्चों या पालतू जानवरों से जुड़ी घटनाएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तीन गुना अधिक दर्ज की गईं।

26–30 वर्ष के युवा सबसे ज्यादा स्मार्टफोन पर निर्भर

रिपोर्ट में 26 से 30 वर्ष की आयु के लोगों को भारत का सबसे अधिक कनेक्टेड स्मार्टफोन उपयोगकर्ता वर्ग बताया गया है। यह आयु वर्ग संचार, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और मनोरंजन जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए स्मार्टफोन पर सबसे अधिक निर्भर पाया गया।

ऐसे में फोन के खराब होने या टूटने की स्थिति में इस वर्ग के लिए असुविधा के साथ-साथ आर्थिक नुकसान का जोखिम भी बढ़ जाता है।

प्रोटेक्शन प्लान लेने वालों की संख्या कम

इतने बड़े स्तर पर फोन को नुकसान पहुंचने के बावजूद स्मार्टफोन सुरक्षा योजनाओं को अपनाने की दर काफी कम है। अध्ययन के अनुसार 36 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के दौरान कभी न कभी सुरक्षा योजना ली है। लेकिन वर्तमान समय में केवल 6–8 प्रतिशत उपभोक्ता ही सक्रिय रूप से ऐसे प्रोटेक्शन कार्यक्रम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वनअसिस्ट के को-फाउंडर सुब्रत पाणि ने कहा कि स्मार्टफोन लोगों के संवाद, लेन-देन, काम और मनोरंजन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिना किसी सुरक्षा के महंगे उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती डिवाइस कीमतों और लंबे उपयोग के दौर में उपभोक्ताओं को सरल, किफायती और भरोसेमंद सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने की जरूरत है।

रीफर्बिश्ड फोन बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत

अध्ययन ने भारत में तेजी से बढ़ते रीफर्बिश्ड और प्री-ओन्ड स्मार्टफोन बाजार को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। 70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का मानना है कि नए फोन की तुलना में प्री-ओन्ड डिवाइस के लिए प्रोटेक्शन प्लान अधिक महत्वपूर्ण हैं।

वहीं, 30 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि वारंटी या प्रोटेक्शन प्लान की उपलब्धता उन्हें प्री-ओन्ड स्मार्टफोन खरीदने के लिए प्रेरित कर सकती है। इससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा और वारंटी योजनाएं आने वाले समय में रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स, लेकिन सुरक्षा में बड़ा अंतर

रिपोर्ट के अनुसार भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं और डिवाइस के इस्तेमाल की औसत अवधि तीन वर्ष से अधिक हो रही है। दूसरी ओर, स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में फोन की वास्तविक कीमत और उसकी सुरक्षा के लिए अपनाए जा रहे उपायों के बीच का अंतर उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक जोखिम बढ़ा रहा है।

अध्ययन में स्मार्टफोन ब्रांड्स, रिटेलर्स, बीमा कंपनियों और प्रोटेक्शन सर्विस प्रदाताओं से उपभोक्ताओं के लिए किफायती और पारदर्शी सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार स्मार्टफोन सुरक्षा को केवल फोन खरीदते समय मिलने वाले अतिरिक्त विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि डिवाइस के पूरे स्वामित्व काल का हिस्सा माना जाना चाहिए।

अध्ययन का मुख्य संदेश साफ है—भारतीय स्मार्टफोन पर पहले से कहीं ज्यादा निर्भर हैं, फोन को नुकसान भी लगातार हो रहा है, लेकिन सुरक्षा योजना अपनाने वाले उपभोक्ताओं की संख्या अभी भी बेहद कम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *