चंडीगढ़, 15 जुलाई : सेक्टर-31 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन के साथ भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। उत्कल सांस्कृतिक संघ द्वारा आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन के दिव्य नवयौवन स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नेत्रोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक ओड़िया ‘हुलहुली’ की मंगलध्वनि से गूंज उठा। पुरोहितों ने विधिवत पूजा-अर्चना और हवन संपन्न कराया। इस दौरान मंदिर के शिखर पर नई ध्वजा भी स्थापित की गई तथा 15 दिनों के अनासार (एकांतवास) के बाद भगवान के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर विशेष स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस अवधि को ‘अनासार’ कहा जाता है। स्वस्थ होने के बाद भगवान पहली बार नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे ‘नेत्रोत्सव’ या ‘नवयौवन दर्शन’ के नाम से जाना जाता है। इसके बाद ही भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा का आयोजन होता है।
उत्कल सांस्कृतिक संघ के सांस्कृतिक सचिव अनिल मालिक ने बताया कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाली जाएगी। रथयात्रा सेक्टर-31 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर सेक्टर-32, 29, 30, 20, 21, 34, 44, 45 और 47 से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में संपन्न होगी।
उन्होंने बताया कि रथयात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात रहेगी। संघ ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा में शामिल होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया।

















