चंडीगढ़ : भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) उत्तरी क्षेत्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय सीआईआई वेंडर कनेक्ट एक्सपो 2026 का सोमवार को सेक्टर-31ए स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में शुभारंभ हुआ। 13 और 14 जुलाई तक चलने वाले इस एक्सपो में देशभर की लगभग 70 अग्रणी विनिर्माण कंपनियां भाग ले रही हैं। आयोजन का उद्देश्य भारतीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई, को रक्षा एवं रणनीतिक क्षेत्रों के प्रमुख खरीदारों से जोड़ते हुए स्वदेशी विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को नई गति देना है।
प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आई कंपनियां प्रिसिजन इंजीनियरिंग, हेवी मैन्युफैक्चरिंग, औद्योगिक ऑटोमेशन तथा डिजिटल इंजीनियरिंग समाधानों का प्रदर्शन कर रही हैं। एक्सपो उद्योगों के लिए बड़े खरीदारों, रक्षा प्रतिष्ठानों और सरकारी एजेंसियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद एवं व्यावसायिक साझेदारी का प्रभावी मंच बना हुआ है।
कार्यक्रम में भारतीय वायु सेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग जगत से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को गति देने का आह्वान किया। भारतीय वायु सेना के 3 बेस रिपेयर डिपो के विंग कमांडर अजय गांधी ने कहा कि भारत को आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी विकल्प विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग यदि गुणवत्ता, सुरक्षा और नवाचार के मानकों पर खरे उतरते हैं तो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने स्वदेशी एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) क्षमताओं के विकास को भी समय की आवश्यकता बताया।
डीआरडीओ के अंतर्गत टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) के तकनीकी निदेशक नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि रक्षा उत्पादन में भारतीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई, की भागीदारी बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ‘SAMAR’ फ्रेमवर्क के माध्यम से उद्योगों के लिए डीआरडीओ से जुड़ना पहले की तुलना में अधिक सरल और किफायती बनाया गया है। टीबीआरएल परीक्षण एवं मूल्यांकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराकर रक्षा उत्पादों के विकास में उद्योगों का सहयोग कर रहा है, जिससे नवाचार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार, सीआईआई वेंडर कनेक्ट एक्सपो 2026 केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उद्योग, रक्षा प्रतिष्ठानों और खरीद एजेंसियों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का एक प्रभावी मंच है। इससे देश की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।

















