काठमांडू : बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल में नई सरकार का गठन हो गया है। 27 मार्च 2026 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वे नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में शामिल हो गए। पूर्व रैपर, इंजीनियर और काठमांडू महानगर के मेयर रहे बालेन शाह को देश की नई राजनीति और युवा आकांक्षाओं का चेहरा माना जा रहा है। वे नेपाल के पहले मधेसी प्रधानमंत्री भी बने हैं।
नेपाल में 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पार्टी ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। नेपाल में लंबे समय से गठबंधन सरकारों का दौर रहा था, लेकिन इस बार जनता ने एक मजबूत और स्थिर सरकार के पक्ष में मतदान किया। नेपाल में 1999 के बाद पहली बार किसी दल को इतना स्पष्ट बहुमत मिला है।
नेपाल की नई सरकार केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत मानी जा रही है। वर्ष 2025 में देशभर में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और राजनीतिक संरक्षणवाद के खिलाफ बड़े पैमाने पर युवा आंदोलन हुए थे। इन प्रदर्शनों में 76 लोगों की मौत हुई थी और इन्हीं आंदोलनों ने पारंपरिक दलों के खिलाफ जनमत तैयार किया। इसके बाद संसद भंग हुई और अंतरिम सरकार के नेतृत्व में नए चुनाव कराए गए।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने शपथ ग्रहण भाषण में कहा कि उनकी सरकार कम खर्च, तेज निर्णय और पारदर्शी प्रशासन के सिद्धांत पर काम करेगी। इसी कारण उन्होंने अपेक्षाकृत छोटी, 14–15 सदस्यीय मंत्रिपरिषद बनाई है। सरकार में अनुभवी राजनेताओं के बजाय युवा, शिक्षित और पेशेवर चेहरों को अधिक महत्व दिया गया है।
नई मंत्रिपरिषद
प्रधानमंत्री : पूर्व रैपर, सिविल इंजीनियर और काठमांडू के लोकप्रिय मेयर रहे बालेन शाह को नेपाल की नई राजनीति का चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने युवाओं, शहरी मतदाताओं और भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन के समर्थन से राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की।
वित्त मंत्री : नेपाल के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों में गिने जाने वाले स्वर्णिम वाग्ले ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन किया है और आर्थिक नीति, रोजगार तथा निवेश के क्षेत्र में विशेषज्ञ माने जाते हैं। नई सरकार की आर्थिक नीतियों की जिम्मेदारी उन्हीं के हाथों में है।
गृह मंत्री : सामाजिक कार्यकर्ता और युवा आंदोलन से जुड़े चेहरों में शामिल सुधन गुरुङ को कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और 2025 के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच की जिम्मेदारी मिली है।
विदेश मंत्री : शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े रहे शिशिर खनाल को भारत, चीन, अमेरिका और अन्य देशों के साथ नेपाल के संबंधों को संतुलित करने की जिम्मेदारी मिली है। वे पहले भी शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य मंत्री : नेपाल की सबसे युवा महिला सांसदों में शामिल सोबिता गौतम कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्हें संसदीय सुधार और विधायी मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री : बिराज भक्त श्रेष्ठ को नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं और भारत के साथ ऊर्जा व्यापार को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री : युवा और तकनीकी पृष्ठभूमि से आने वाले सस्मित पोखरेल से शिक्षा सुधार, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की उम्मीद की जा रही है।
स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री : निशा मेहता को ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों की स्थिति और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली है।
महिला, बालबालिका एवं ज्येष्ठ नागरिक मंत्री : सीता बादी को सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। वे बादी समुदाय से आने वाली पहली प्रमुख महिला मंत्री मानी जा रही हैं।
श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री : दीपक कुमार साह के सामने सबसे बड़ी चुनौती विदेश पलायन को कम करना और देश के भीतर रोजगार के अवसर बढ़ाना होगा।
कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्री : गीता चौधरी को कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
भौतिक पूर्वाधार एवं यातायात मंत्री : सुनिल लामसाल को सड़क, पुल, परिवहन और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री : विक्रम तिमिल्सिना को डिजिटल प्रशासन, इंटरनेट नीति और सरकारी संचार व्यवस्था को मजबूत करने का दायित्व मिला है।
संघीय मामिला एवं सामान्य प्रशासन मंत्री : प्रतिभा रावल को प्रशासनिक सुधार, स्थानीय निकायों और नौकरशाही के बीच तालमेल बेहतर करने की जिम्मेदारी दी गई है।
नेपाल की नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं । इनमें बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, विदेश पलायन, कमजोर अर्थव्यवस्था और भारत-चीन के बीच संतुलित विदेश नीति शामिल हैं। इसके अलावा 2025 के हिंसक आंदोलनों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई भी सरकार की प्राथमिकता होगी। नेपाल में 1990 के बाद से 32 सरकारें बन चुकी हैं और कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। ऐसे में बालेन शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थिर शासन देना होगी।
भारत सहित कई देशों ने नेपाल की नई सरकार का स्वागत किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह को बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग, व्यापार, ऊर्जा और सीमा संबंधों को मजबूत करने की बात कही है।

















