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चंडीगढ़/ सुरसरगम कला मंच की संगीतमय संध्या में गूंजे देव आनंद और किशोर कुमार के सदाबहार गीत

‘आये तुम याद हमें-8’ के तहत ‘देव-किशोर: द इम्मोर्टल जोड़ी’ कार्यक्रम का आयोजन, पांच अविवाहित बेटियों को उपहार देकर किया प्रोत्साहित

चंडीगढ़, 17 अक्टूबर 2026 : सुरसरगम कला मंच, चंडीगढ़ की ओर से शनिवार को सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट आर्ट म्यूजियम में हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता देव आनंद और महान गायक किशोर कुमार की स्मृति में संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया। ‘आये तुम याद हमें-8’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक ‘देव-किशोर: द इम्मोर्टल जोड़ी’ रखा गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने दोनों महान हस्तियों के सदाबहार गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को पुरानी हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम दौर की यादों में पहुंचा दिया।

कार्यक्रम में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता गुरदर्शन सिंह सौनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों में सीनियर्स पैशन ग्रुप के कर्नल बी.के. शर्मा, यादगारे रफी सोसाइटी के बी.डी. शर्मा, भाजपा मोहाली के उपाध्यक्ष अनुज अग्रवाल, प्रदीप शर्मा और सतपाल बंसल उपस्थित रहे।

संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम में पर्यावरण और हिंदी फिल्मों पर आधारित रोचक प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई। क्विज मास्टर किशोर कुमार शर्मा ने अपने दिलचस्प अंदाज में श्रोताओं से सवाल पूछे और सही उत्तर देने वालों को पुरस्कृत किया। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से उपस्थित लोगों को मनोरंजन के साथ उपयोगी जानकारियां भी मिलीं।

सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ—हुनरमंद बनाओ और आगे बढ़ाओ’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत पांच अविवाहित लड़कियों को उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। इस पहल के माध्यम से बेटियों के सम्मान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. भारत भूषण शर्मा ने किया। संगीत प्रस्तुतियों में नीलम शर्मा और कर्नल बी.के. शर्मा ने ‘छोड़ दो आंचल जमाना क्या कहेगा’ प्रस्तुत किया। दीपेश इंदर ने ‘धीरे से जाना खटियन में’, रिकी सलारिया ने ‘मैं आया हूं लेकर साज हाथों में’ और केवल कृष्ण सरीन ने ‘बुरे भी हम भले भी हम’ गीत गाया।

इसके अलावा नैन्सी और अंकुर ने ‘ओ मेरे राजा’, डॉ. जी.एस. मावी ने ‘माना जनाब ने पुकारा नहीं’, डॉ. एच.एस. कालरा ने ‘ख्वाब हो या कोई हकीकत’ तथा मोना शर्मा और राज कुमार ने ‘आंखों-आंखों में हम तुम’ गीत से समां बांधा।

पूनम शर्मा और किशोर कुमार शर्मा ने ‘दूरियां नजदीकियां बन गईं’, कुलदीप और तरसेम ने ‘यारों नीलम करो सुस्ती’, अनुराधा और विक्रम जीत ने ‘पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए’ तथा अविनाश बंसल ने ‘रुक जाना ओ जाना हमसे दो बातें करके’ गीत प्रस्तुत किया।

विजय टिक्कू ने ‘कैसा है मेरे दिल तू खिलाड़ी’, हरजीत और राजेश ने ‘मेरे प्याले में शराब डाल दे’, शीनम और आर.के. टिटू ने ‘चारु चंद्र की चंचल चितवन’, मदन लाल ने ‘ओ निगाहें मस्ताना’, डॉ. अनिल शर्मा ने ‘जीवन के सफर में राही’, डॉ. राकेश मल्होत्रा ने ‘दिल की कलम से तुझको’ और डॉ. भारत भूषण शर्मा ने ‘मरने की दुआएं क्यों मांगूं’ गीत की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों ने देव आनंद और किशोर कुमार की अमर संगीत विरासत को जीवंत कर दिया। संगीत, मनोरंजन, ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी और सामाजिक संदेश के संगम ने संध्या को यादगार बनाया।

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