अप्पन विराटगढ़ परोपकार समाज सहित हजारों मैथिलों ने जताई खुशी, भाषा-संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विराटनगर (नेपाल), 13 अक्टूबर 2026 : नेपाल के कोशी प्रदेश में मैथिली को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में शामिल किए जाने के निर्णय का मैथिल समाज ने हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया है। इस निर्णय से विराटनगर सहित पूरे कोशी प्रदेश के मैथिलीभाषियों में खुशी की लहर है। अप्पन विराटगढ़ परोपकार समाज की अध्यक्ष वसुंधरा झा, पंकज लाभ, हरि साह, पूनम कर्ण सहित हजारों मैथिलों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृति और पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोशी प्रदेश सभा ने 10 अक्टूबर 2026 (24 आश्विन 2083) को सरकारी कामकाज की भाषा से संबंधित विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था। इस विधेयक के तहत नेपाली भाषा के अतिरिक्त मैथिली सहित प्रदेश में प्रचलित 13 अन्य मातृभाषाओं को सरकारी कामकाज में प्रयोग करने का कानूनी आधार प्रदान किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश की बहुभाषिक, बहुजातीय और बहुसांस्कृतिक पहचान को सम्मान देना तथा आम नागरिकों की सरकारी निकायों तक पहुंच को अधिक सहज बनाना है।
मैथिली को सरकारी कामकाज में स्थान मिलने से मैथिलीभाषी समुदाय को अपनी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ने के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, इस पहल से नई पीढ़ी में अपनी भाषा के प्रति लगाव बढ़ाने, मैथिली साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने और भाषाई विविधता को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है।
अप्पन विराटगढ़ परोपकार समाज की अध्यक्ष वसुंधरा झा सहित समाज के विभिन्न लोगों ने इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत की संवाहक होती है। सरकारी कामकाज में मैथिली को स्थान मिलना मैथिल समाज के लिए गौरव का विषय है। इससे मैथिलीभाषियों को अपनी भाषा और पहचान के प्रति सम्मान की अनुभूति होगी।
हालांकि, इस निर्णय का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है। इसके लिए सरकारी कार्यालयों में मैथिली के प्रयोग की व्यवस्था, आवश्यक जनशक्ति, अनुवाद एवं दस्तावेजीकरण की सुविधा, बजट आवंटन और संस्थागत ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
कोशी प्रदेश में मैथिली को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में शामिल किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए मैथिल समाज ने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, ताकि मातृभाषा के माध्यम से आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके और नेपाल की भाषाई विविधता को और मजबूती मिले।

















