चंडीगढ़ : पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ में 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक मनाए जा रहे 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का मंगलवार को शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पीजीआईएमईआर के निदेशक डॉ. विवेक लाल और नेत्र रोग विभाग की प्रमुख प्रो. उषा सिंह ने गुब्बारे उड़ाकर अभियान की शुरुआत की।
कार्यक्रम में एडवांस्ड आई सेंटर के कॉर्निया विभाग के विशेषज्ञों, आई बैंक के कर्मचारियों, लायंस क्लब चंडीगढ़ सेंट्रल के सदस्यों तथा संस्थान के अन्य चिकित्सकों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा देशभर में हर वर्ष 15 दिनों तक मनाया जाने वाला जागरूकता अभियान है। इसका उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करना और मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के लिए प्रेरित करना है। देश में यह अभियान वर्ष 1985 से चलाया जा रहा है।
चिकित्सा क्षेत्र में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधाएं बढ़ने के बावजूद जरूरतमंद मरीजों और उपलब्ध कॉर्निया के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। वर्तमान में भारत में करीब 11 लाख लोग कॉर्निया संबंधी अंधत्व से प्रभावित हैं, जबकि हर वर्ष लगभग 25 से 30 हजार कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जाते हैं। पीजीआईएमईआर में भी 1,000 से अधिक मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में हैं, जबकि संस्थान को हर वर्ष करीब 400 से 500 दान किए गए कॉर्निया ही मिल पाते हैं।
पखवाड़े के दौरान लोगों को नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों, डर और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों और शिक्षण संस्थानों सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर नेत्रदान को लेकर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में पोस्टर बनाने और निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 3 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे रॉक गार्डन से सुखना लेक तक आई डोनेशन अवेयरनेस वॉकथॉन आयोजित किया जाएगा।
पखवाड़े का समापन 5 सितंबर 2026 को एडवांस्ड आई सेंटर, पीजीआईएमईआर में आयोजित कार्यक्रम के साथ होगा। इस अवसर पर जागरूकता अभियान में योगदान देने वाले प्रतिभागियों और सहयोगियों को सम्मानित किया जाएगा।
पीजीआईएमईआर आई बैंक और नेत्र रोग विभाग ने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान के बारे में सही जानकारी हासिल करें, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें और मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लें। नेत्रदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दोबारा दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है।

















