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चंडीगढ़/ किडनी स्टोन और बढ़े प्रोस्टेट के इलाज में फोर्टिस मोहाली ने शुरू की मोज़ेस 2.0 लेजर तकनीक

चंडीगढ़ : किडनी स्टोन और बढ़े हुए प्रोस्टेट से जूझ रहे मरीजों के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली ने यूरोलॉजी के क्षेत्र में अत्याधुनिक मोज़ेस 2.0 होल्मियम लेजर सिस्टम की शुरुआत की है। अस्पताल के अनुसार, इस तकनीक को उपलब्ध कराने वाला फोर्टिस मोहाली उत्तर भारत का पहला अस्पताल बन गया है।

नई लेजर तकनीक के जरिए किडनी स्टोन और बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) जैसी आम यूरोलॉजिकल समस्याओं का इलाज शरीर में बड़े चीरे या बाहरी टांकों के बिना किया जा सकता है। इसमें प्राकृतिक यूरिनरी पैसेज के जरिए अत्याधुनिक उपकरणों को संबंधित हिस्से तक पहुंचाकर उपचार किया जाता है।

किडनी स्टोन के इलाज में RIRS तकनीक के माध्यम से बेहद पतले और लचीले उपकरण को यूरिनरी ट्रैक्ट के रास्ते किडनी तक पहुंचाया जाता है। लेजर की मदद से पथरी को छोटे-छोटे कणों में तोड़ा जाता है, जिससे उन्हें शरीर से बाहर निकालना आसान हो जाता है। खास तौर पर किडनी के ऐसे हिस्सों में मौजूद पथरी के इलाज में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, जहां पारंपरिक तरीकों से पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है।

वहीं, बढ़े हुए प्रोस्टेट के इलाज के लिए MOLEP (Moses Enucleation of the Prostate) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पेशाब के रास्ते में रुकावट पैदा करने वाले अतिरिक्त प्रोस्टेट टिश्यू को लेजर की मदद से सटीक तरीके से अलग कर हटाया जाता है। अस्पताल के मुताबिक, यह तकनीक बड़े आकार के प्रोस्टेट वाले मरीजों के उपचार में भी प्रभावी विकल्प प्रदान करती है।

फोर्टिस मोहाली के सीनियर कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. रोहित डढ़वाल ने कहा कि मोज़ेस 2.0 लेजर यूरोलॉजी में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति है। इसके जरिए स्टोन या प्रोस्टेट टिश्यू तक लेजर ऊर्जा को अधिक नियंत्रित और सटीक तरीके से पहुंचाना संभव होता है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक का उद्देश्य प्रक्रिया के समय को कम करने, रक्तस्राव घटाने और मरीजों को जल्द रिकवरी में मदद करना है।

डॉ. डढ़वाल ने कहा कि RIRS के माध्यम से बिना बाहरी चीरे के यूरिनरी पैसेज के जरिए किडनी स्टोन का उपचार किया जा सकता है, जबकि MOLEP तकनीक बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण पैदा हुई पेशाब की रुकावट को दूर करने में मदद करती है।

फोर्टिस मोहाली में इस तकनीक की उपलब्धता से पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अत्याधुनिक लेजर आधारित यूरोलॉजी उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इससे जटिल किडनी स्टोन और बढ़े हुए प्रोस्टेट के मामलों में आधुनिक मिनिमली इनवेसिव उपचार की सुविधा को और मजबूती मिलेगी।

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