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चंडीगढ़/ मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में ECMO की मदद से दो गंभीर मरीजों को मिली नई जिंदगी

चंडीगढ़, 18 जून 2026 : फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली ने अत्याधुनिक ECMO (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) तकनीक की सहायता से दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों का सफल उपचार कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है। इनमें एक 47 वर्षीय महिला और एक 38 वर्षीय पुरुष शामिल हैं, जिनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि सामान्य उपचार पद्धतियां प्रभावी साबित नहीं हो रही थीं।

ECMO को गंभीर हृदय एवं फेफड़ा विफलता की स्थिति में जीवन रक्षक तकनीक माना जाता है। यह मशीन शरीर के बाहर रक्त को ऑक्सीजन प्रदान कर कार्बन डाइऑक्साइड निकालती है और फिर उसे शरीर में वापस पहुंचाती है, जिससे हृदय और फेफड़ों को आराम और रिकवरी का समय मिलता है।

पहले मामले में, 47 वर्षीय महिला गंभीर निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) से पीड़ित थी। दूसरे अस्पताल से रेफर होकर फोर्टिस पहुंची इस मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी और वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद शरीर में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम बना हुआ था। विशेषज्ञों की टीम ने तत्काल वेनो-वीनस (VV) ECMO शुरू किया, जो गंभीर श्वसन विफलता के मरीजों को सहारा देने के लिए उपयोग किया जाता है।

लगभग तीन सप्ताह तक गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में उपचार और निरंतर निगरानी के बाद मरीज के फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार हुआ। एक महीने तक चली जिंदगी की जंग के बाद उसे ECMO से सफलतापूर्वक हटाकर स्वस्थ एवं स्थिर अवस्था में घर भेज दिया गया।

दूसरे मामले में, 38 वर्षीय पुरुष को गलती से सेल्फोस नामक अत्यंत विषैले कीटनाशक के सेवन के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती के समय वह मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन और गंभीर हृदय विफलता से जूझ रहा था। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने वेनो-आर्टेरियल (VA) ECMO शुरू किया, जो हृदय और रक्त संचार दोनों को अस्थायी सहारा प्रदान करता है।

लगभग सात दिनों तक ECMO सपोर्ट पर रहने के बाद मरीज के हृदय की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया और उसे सफलतापूर्वक ECMO से हटाया गया। फिलहाल वह मेडिकल ICU में विशेषज्ञों की निगरानी में स्वस्थ होने की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के डायरेक्टर, क्रिटिकल केयर डॉ. अरुण के. शर्मा ने कहा कि जब पारंपरिक उपचार विकल्प असफल हो जाते हैं, तब ECMO जीवन रक्षक तकनीक के रूप में सामने आती है। इन दोनों मामलों की सफलता यह दर्शाती है कि समय पर ECMO उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों के जीवन को बचाया जा सकता है।

सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. टी.एस. महंत ने बताया कि ECMO उपचार बहु-विषयक विशेषज्ञों के समन्वित प्रयास का परिणाम होता है। सही समय पर सही मरीज का चयन और शीघ्र ECMO सपोर्ट बेहतर परिणाम सुनिश्चित कर सकता है।

वहीं, डायरेक्टर कार्डियक एनेस्थीसिया डॉ. मनोरंजन साहू ने कहा कि अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में ECMO मरीजों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण साबित हो सकता है और कई बार यही तकनीक जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाती है।

फोर्टिस मोहाली की यह उपलब्धि एक बार फिर दर्शाती है कि आधुनिक क्रिटिकल केयर और उन्नत चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से जटिल एवं जानलेवा स्थितियों में भी मरीजों को नई जिंदगी दी जा सकती है।

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