चंडीगढ़ : कुछ कहानियां साहस, दृढ़ता और अटूट इच्छाशक्ति की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है विवेक हाई स्कूल, चंडीगढ़ की कक्षा 10 की छात्रा श्रेयसी जेराथ की, जिन्होंने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शानदार 96% अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि मजबूत हौसले के आगे कठिनाइयां भी हार मान लेती हैं।
11 सितंबर 2022 को श्रेयसी का जीवन अचानक बदल गया, जब वह दोपहर की नींद से उठीं और अपने शरीर को हिलाने में असमर्थ पाईं। उन्हें तुरंत सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल से पीजीआईएमईआर (PGI) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी LETM (Longitudinally Extensive Transverse Myelitis) से पीड़ित बताया। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी में सूजन के कारण चारों अंगों में लकवा हो जाता है।
इसके बाद श्रेयसी को लंबे समय तक गंभीर इलाज से गुजरना पड़ा। वेंटिलेटर सपोर्ट, ट्रेकियोस्टॉमी और कई जटिल सर्जरी के साथ-साथ उन्हें बार-बार संक्रमण और तेज बुखार का सामना करना पड़ा। आठवीं कक्षा से ही वह व्हीलचेयर पर निर्भर हो गईं, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई।
ऐसे कठिन समय में विवेक हाई स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती रेनू पुरी ने उन्हें स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल ने श्रेयसी में नया आत्मविश्वास जगाया और वह धीरे-धीरे व्हीलचेयर पर स्कूल आना शुरू कर दीं।
कक्षा 10 के दौरान भी उन्हें दो बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी निजी ट्यूशन के पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने कक्षा में सीखे गए पाठ और अपनी मां की मदद से पढ़ाई पूरी की। शिक्षकों ने भी हर कदम पर सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया।
शुरुआत में उनका लक्ष्य सिर्फ बिना एक साल गंवाए परीक्षा पास करना था, लेकिन अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने 96% अंक हासिल कर एक बड़ी सफलता अर्जित की।
श्रेयसी की यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उनके माता-पिता, शिक्षकों और दादा श्री के.के. जेराथ का मार्गदर्शन और समर्थन इस सफलता में महत्वपूर्ण रहा।
श्रेयसी की कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां हमें कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाती हैं। सच्ची सफलता वही है, जिसमें हर चुनौती का डटकर सामना किया जाए।

















