कोशी प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की हुई पहल
पर्यटन को लेकर सीमांचल से नई संभावनाएं तलाशने की हुई कोशिश

सुनसरी (नेपाल) : इटहरी स्थित सोल्टी वेस्टएंड होटल में 28 से 30 मार्च तक छठे ईस्टर्न ट्रेवल मार्ट 2026 का भव्य आयोजन किया गया । इस आयोजन में नेपाल पर्यटन बोर्ड और इटहरी उपमहानगरपालिका की सक्रिय भूमिका रही । इस आयोजन के माध्यम से कोशी प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। तीन दिवसीय इस आयोजन में नेपाल, भारत और भूटान से आए पर्यटन व्यवसायी, होटल संचालक, ट्रेवल एजेंसियां, एयरलाइंस प्रतिनिधि, पत्रकार, सरकारी अधिकारी और निवेशक शामिल हुए।
कार्यक्रम का उद्घाटन कोशी प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने किया। मुख्यमंत्री पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बावजूद अन्य व्यस्तताओं के कारण समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री ने कहा कि कोशी प्रदेश में हिमालय, धार्मिक धाम, चाय बागान, वन्यजीव, सांस्कृतिक विरासत और साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सरकार इन सभी क्षेत्रों को जोड़ते हुए कोशी प्रदेश को नेपाल के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
ईस्टर्न ट्रेवल मार्ट 2026 में लगभग 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार, 100 से अधिक विक्रेता और प्रदर्शक, 10 से अधिक वक्ता तथा तीन देशों के कई प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में B2B और B2C बैठकें, पर्यटन प्रदर्शनी, होटल और ट्रेवल कंपनियों के स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, तकनीकी सत्र और नेटवर्किंग बैठकें आयोजित की गईं। इस आयोजन का उद्देश्य पूर्वी नेपाल के पर्यटन उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ना और पर्यटन क्षेत्र में निवेश के नए अवसर तैयार करना था।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक तथा NATTA कोशी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुण्य प्रसाद भट्टराई ने कहा कि कोशी प्रदेश और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच पर्यटन सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि बिहार का सीमांचल क्षेत्र—जिसमें पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार और सुपौल जैसे जिले शामिल हैं—पूर्वी नेपाल के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि सीमांचल के लाखों लोग धार्मिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य और पर्वतीय पर्यटन के लिए हर वर्ष नेपाल आते हैं और यदि सड़क, सीमा चौकियों, होटल, परिवहन और पैकेज टूर की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए, तो भारतीय पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जैसे शहर नेपाल के लिए केवल पर्यटक स्रोत नहीं हैं, बल्कि होटल, ट्रांसपोर्ट, ट्रेवल एजेंसी और व्यापार के बड़े केंद्र भी हैं। सीमांचल क्षेत्र के जरिए भारत के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक नेपाल के कोशी प्रदेश तक पहुंच सकते हैं।
इस बार के आयोजन में भारतीय पत्रकारों और पर्यटन व्यवसायियों की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दर्जनों मीडिया प्रतिनिधि, ट्रेवल एजेंट और टूर ऑपरेटर कार्यक्रम में शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार व संपादक पंकज रंजीत के नेतृत्व में आए भारतीय पत्रकारों ने कोशी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया तथा इसे भारत-नेपाल पर्यटन सहयोग का नया मंच बताया। आयोजकों का मानना है कि भारतीय मीडिया में सकारात्मक प्रचार मिलने से आने वाले वर्षों में कोशी प्रदेश में भारतीय पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
मार्ट के दौरान प्रतिभागियों को धरान, भेडेटार, चतरा, बराहक्षेत्र, मुक्तिधाम मंदिर, गौशाला धाम के साथ साथ रमाडा व नेपालिरिका होटल का भी भ्रमण कराया गया। कुछ प्रतिभागियों के लिए चतरा से बराहक्षेत्र तक नौका विहार और धार्मिक पर्यटन पैकेज की भी विशेष व्यवस्था की गई। इन भ्रमण कार्यक्रमों का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन, नदी पर्यटन और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को प्रदर्शित करना था।
ज्ञात हो कि कोशी प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में धरान, भेडेटार, इलाम के चाय बागान, पाथीभरा मंदिर, कोशी टप्पू वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र, हालेसी महादेव, बराहक्षेत्र, विराटनगर और कंचनजंघा क्षेत्र शामिल हैं। विशेष रूप से कोशी टप्पू को पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां, जंगली भैंसा और डॉल्फिन जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं।
मार्ट के दौरान “कोशी पर्यटन वर्ष 2082” अभियान को भी प्रमुखता से बढ़ावा दिया गया। सरकार ने 15 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सड़क, होटल, पर्यटन अवसंरचना, डिजिटल प्रचार और सीमा पार संपर्क को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों का मानना है कि यदि भारत के सीमांचल, उत्तर बंगाल और भूटान के साथ बेहतर पर्यटन संपर्क स्थापित किया जाए, तो कोशी प्रदेश आने वाले वर्षों में नेपाल का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है।
हालांकि भारतीय पर्यटकों को नेपाल आने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है । उनकी समस्याओं के समाधान हेतु नेपाल पर्यटन बोर्ड एवं अन्य संस्थाओं द्वारा कुछ ठोस कदम उठाने की भी जरूरत है । सीमांचल और कोशी प्रदेश मिलकर दक्षिण एशिया का नया “क्रॉस बॉर्डर टूरिज्म कॉरिडोर” भी विकसित कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

















