एडवांस्ड इमेजिंग से कैंसर की सटीक पहचान, फ्लोरेसेंस तकनीक से सर्जरी में मदद और रोबोटिक प्रक्रिया से स्तन पुनर्निर्माण के विकल्पों को मिल रहा विस्तार
चंडीगढ़, 15 अक्टूबर 2026 : स्तन कैंसर के उपचार में अब केवल बीमारी को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि मरीज की शारीरिक संरचना, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना भी चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। इसी दिशा में फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली आधुनिक इमेजिंग, फ्लोरेसेंस- गाइडेड सर्जरी और रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल से स्तन कैंसर के उपचार को अधिक सटीक और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
अस्पताल के स्तन एवं एंडोक्राइन सर्जरी विभाग में डॉ. नवल बंसल, एडीशनल डायरेक्टर के नेतृत्व में कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड मैमोग्राफी (सीईएम), एसपीवाई- पीएचआई नियर-इन्फ्रारेड फ्लोरेसेंस इमेजिंग सिस्टम और दा विंची शी रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनका उद्देश्य बीमारी की सीमा का बेहतर आकलन, सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण संरचनाओं की पहचान और उपयुक्त मरीजों में स्तन पुनर्निर्माण के विकल्पों को बेहतर बनाना है।
एक गांठ की शिकायत, जांच में सामने आए कैंसर के कई केंद्र
अस्पताल में उपचार के लिए पहुंची 45 वर्षीय महिला के दाएं स्तन में गांठ थी। शुरुआती शिकायत के आधार पर आगे की जांच की गई, जिसमें कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड मैमोग्राफी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस तकनीक में नस के माध्यम से कॉन्ट्रास्ट एजेंट दिया जाता है, जिससे असामान्य रक्त आपूर्ति वाले संदिग्ध हिस्सों की पहचान करने में मदद मिलती है।
जांच में स्तन के दो अलग-अलग स्थानों पर ट्यूमर होने की पुष्टि हुई। इस निष्कर्ष ने स्पष्ट किया कि केवल गांठ की मौजूदगी के आधार पर बीमारी की पूरी सीमा का अनुमान लगाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। विस्तृत जांच से सर्जरी की योजना तैयार करने और प्रभावित हिस्सों का उचित उपचार करने में मदद मिली।
मरीज की दोनों गांठों को आसपास के पर्याप्त ऊतकों सहित निकालने के लिए वाइड लोकल एक्सीजन किया गया। इसके साथ ही कैंसर के लिम्फ नोड्स तक फैलने की स्थिति का आकलन करने के लिए सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी की गई। फ्लोरेसेंस इमेजिंग की सहायता से संबंधित लिम्फ नोड की पहचान करने और सर्जरी के बाद पुनर्निर्मित ऊतकों में रक्त प्रवाह का आकलन करने में मदद मिली।
ट्यूमर निकालने के बाद आसपास के ऊतकों से फ्लैप बनाकर स्तन का पुनर्निर्माण किया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य कैंसर के उपचार के साथ स्तन के आकार और बाहरी स्वरूप को यथासंभव संतुलित बनाए रखना था।
रोबोटिक सर्जरी से स्तन पुनर्निर्माण का विकल्प
दूसरे मामले में एक युवा महिला को मल्टी-सेंट्रिक स्तन कैंसर का पता चला, जिसमें स्तन के अलग-अलग स्थानों पर ट्यूमर मौजूद थे। सर्जरी से पहले उन्हें नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी दी गई। बीमारी की स्थिति को देखते हुए स्तन हटाने की सर्जरी आवश्यक मानी गई, लेकिन मरीज की इच्छा थी कि उपचार के बाद स्तन का प्राकृतिक बाहरी स्वरूप भी यथासंभव बरकरार रहे।
मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और उपचार संबंधी पहलुओं का आकलन करने के बाद दा विंची शी रोबोटिक सिस्टम की सहायता से निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी की गई। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त स्तन ऊतकों को हटाते हुए, उपयुक्तता के आधार पर निप्पल-एरिओला कॉम्प्लेक्स और स्तन की बाहरी त्वचा को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद इम्प्लांट की मदद से स्तन का पुनर्निर्माण किया गया।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि चयनित मरीजों में कैंसर के उपचार और पुनर्निर्माण की योजना एक साथ बनाकर शारीरिक स्वरूप से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, इस प्रकार की सर्जरी हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती और इसका निर्णय कैंसर की स्थिति तथा चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
डॉ. नवल बंसल ने बताया तकनीकों के एकीकरण का महत्व
फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के स्तन एवं एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के एडीशनल डायरेक्टर डॉ. नवल बंसल के अनुसार, आधुनिक इमेजिंग तकनीकें कैंसर के वास्तविक फैलाव को समझने में मदद करती हैं, जबकि फ्लोरेसेंस-गाइडेड सर्जरी लिम्फ नोड की पहचान और ऊतकों में रक्त प्रवाह के आकलन में उपयोगी हो सकती है। वहीं, रोबोटिक सर्जरी उपयुक्त मरीजों के लिए सर्जरी और पुनर्निर्माण के विकल्पों का विस्तार करती है।
उन्होंने कहा कि उपचार का उद्देश्य कैंसर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के साथ ऐसे कार्यात्मक और कॉस्मेटिक परिणाम हासिल करना है, जिनसे मरीजों को सामान्य जीवन में लौटने में सहायता मिले। आधुनिक तकनीकों का चयन मरीज की व्यक्तिगत जरूरतों और बीमारी की स्थिति के अनुरूप किया जाना चाहिए।
स्तन कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि समय पर जांच, बीमारी का सटीक आकलन और व्यक्तिगत उपचार योजना स्तन कैंसर से लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन में किसी भी असामान्य गांठ या बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

















