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आस्था/ श्रावण मास में रुद्राभिषेक, द्रव्य एवं महात्म्य अति लाभकारी : आचार्य धर्मेन्द्रनाथ

✍️ राजीव कुमार मिश्रा, राघोपुर (सुपौल)

 

आस्था/धर्म : मनुष्य को यदि संपूर्ण ईह लौकिक या पारलौकिक सुख प्राप्त करना व सभी मनोवांछित फलों की प्राप्ति करनी है तो शिव की विशेष पूजन अर्थात रुद्राभिषेक करने या करवाने से ही संभव है। यह कहना है त्रिलोक धाम गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ मिश्र का। उन्होंने रुद्राभिषेक महत्व एवं गूढ़ रहस्य बताते हुए कहा कि जल के द्वारा रुद्राभिषेक करने से वृष्टि होती है। रोग-व्याधि की शांति हेतु कुशोदक से, पशु प्राप्ति के लिए दही के द्वारा, लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए ईक्षूरस (गन्ना रस), धन प्राप्ति के लिए मधु या घी से तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ के जल से अभिषेक करनी चाहिए। पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से गौ दूध के द्वारा अभिषेक करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।

अचार्य धर्मेंद्र नाथ ने बताया कि भगवान शंकर को जल की धारा अति प्रिय है। अतः ज्वर पीड़ा अथवा ज्वर के प्रकोप को शांत करने के लिए जल की धारा से अभिषेक करें। वंश के विस्तार हेतु धृत की धारा से तथा बुद्धि की जड़ता को कम करने के लिए शक्कर मिले दूध से अभिषेक करें। सरसों तेल से अभिषेक करने पर शत्रु का शमन होता है एवं मधु के द्वारा अभिषेक करने से तपेदिक रोग दूर हो जाता है। लेकिन ये आध्यात्मिक पूजन वेदवेक्ताओं के द्वारा ही संपादन करवाने चाहिए। आरोग्य की इच्छा वाले को धृत से, आयु वृद्धि हेतु गो दूध से अभिषेक करवाएं। उपर्युक्त द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक करने पर शिव अति प्रसन्न होकर भक्तों की सभी कामनाओं को पूर्ण करते हैं।