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दरभंगा/ सी एम कॉलेज के संस्थापक पंडित गंगाधर मिश्र की स्मृति में व्याख्यान आयोजित

✍️ हरिमोहन चौधरी, दरभंगा (बिहार)

गंगाधर मिश्र के पौत्र डा शेखर चन्द्र मिश्र ने महाविद्यालय परिसर आकर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को किया रेखांकित

सी एम कॉलेज के सूत्रधार, समाजसेवी, न्यायविद् एवं शिक्षाप्रेमी साधक थे पंडित गंगाधर मिश्र – डा शेखरचन्द्र

व्याख्यान में प्रो विश्वनाथ झा, प्रो इंदिरा झा, डा आर एन चौरसिया तथा प्रो दिवाकर सिंह आदि हुए उपस्थित

दरभंगा : सी एम कॉलेज के सूत्रधार एवं संस्थापक सचिव के रूप में पंडित गंगाधर मिश्र समाजसेवी, न्यायविद् एवं शिक्षाप्रेमी साधक थे। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर लोग उन्हें ‘गंगाधर बाबू’ कहने लगे। वे तत्कालीन दरभंगा महाराज सर कामेश्वर सिंह के अधिकृत राज अधिवक्ता थे। वे मिथिला क्षेत्र की आर्थिक दशा से काफी चिंतित व गंभीर रहते थे, जिसका निदान वे शिक्षा का अलख जगाकर रोजी- रोजगार प्राप्ति तथा बेगारी-बेरोजगारी को दूर करना चाहते थे। वे मिथिला में एक महाविद्यालय की स्थापना के लिए हमेशा चिंतित रहते हुए दरभंगा बार एसोसिएशन के सदस्यों से महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रखा जो स्वीकृत हुआ और एक दानपेटी में इस हेतु अधिवक्ताओं ने कमाई के कुछ अंश डालने प्रारंभ किए।

15 अगस्त,1937 को महाविद्यालय स्थापना का संकल्प लिया गया तथा गंगाधर मिश्र उसके संस्थापक सचिव बनाए गए।उनके सत्प्रयास से मिथिला के एक वैभवशाली व्यक्तित्व बाबू साहेब चंद्रधारी सिंह ने 51 हजार का दान दिया, जिससे मिथिला महाविद्यालय का नाम चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय हो सका। प्रारंभ में यह महाविद्यालय एक निजी भवन में लहेरियासराय में चलता था। 1938 सत्र से ही पठन-पाठन प्रारंभ हुआ। बाद में कॉलेज दरभंगा टावर के पास स्थित गोल मार्केट में स्थापित हुआ जो वर्तमान में चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय है, जबकि कला और वाणिज्य संकाय किलाघाट के बागमती नदी किनारे स्थापित किया गया। वर्तमान चंद्रधारी महाविद्यालय परिसर को गंगाधर निकेतन के नाम से जाना जाता है। उक्त व्याख्यान देते हुए पंडित गंगाधर मिश्र के पौत्र अधिवक्ता डा शेखर चंद्र मिश्र ने कहा कि गंगाधर बाबू की प्रतिभा और प्रखरता से प्रभावित होकर बिहार बार एसोसिएशन,पटना ने 1946 में चंद्रधारी मिथिला विधि महाविद्यालय के नाम से विधि महाविद्यालय स्थापना की स्वीकृति दी। उन्होंने मिथिला में नारी शिक्षा की आवश्यकता महसूस करते हुए 1943 ई. में तत्कालीन गवर्नर की पत्नी लेडी रदरफोर्ड के नाम पर एक बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना लहरियासराय में की जो 1911 ईस्वी में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी बाबू रामनंदन मिश्र के नाम पर परिवर्तित हुआ।

सी एम कॉलेज के संस्थापक के रूप में पंडित गंगाधर मिश्र मिथिला के मालवीय के रूप में सम्मानित हुए तथा उनकी प्रेरणा से मधुबनी के वैभवशाली व्यक्तित्व बाबू रामकृष्ण पूर्वे ने मधुबनी में रामकृष्ण महाविद्यालय की स्थापना 1940 ई. में की। गंगाधर मिश्र प्रख्यात समाजसेवी के रूप में जाने जाते थे। उनका मानना था कि मिथिला का विकास तब तक नहीं होगा,जब तक समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं कुप्रथाओं का अंत सदा के लिए न हो जाए।उन्होंने दहेज-प्रथा तथा घृणित जाति-प्रथा को दूर करने का सार्थक प्रयास किया। वे अखिल भारतीय मैथिल महासभा के सचिव के रूप में विधवा-विवाह तथा छुआछूत उन्मूलन के प्रस्ताव रखें। उन्होंने बिहार, बंगाल तथा उड़ीसा के बंटवारे के आधार पर मिथिलाराज की परिकल्पना की थी। शिक्षा अनुरागी गंगाधर मिश्र टाइफाइड ग्रस्त होने के कारण 53 वर्ष की अवस्था में ही दिवंगत हो गए।

प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित व्याख्यान में महाविद्यालय स्थापना दिवस समारोह-2021 के संयोजक प्रो इंदिरा झा, आयोजन सचिव डा आर एन चौरसिया, महाविद्यालय इतिहास संकलन समिति के संयोजक प्रो दिवाकर सिंह, अंग्रेजी की प्राध्यापिका प्रो मंजू राय, प्रधान सहायक विपिन कुमार सिंह, गंगाधर मिश्र के पौत्र-वधू बसंती मिश्रा, वाणिज्य की प्राध्यापिका डा मीनू कुमारी आदि उपस्थित थे। व्याख्यान के पश्चात् सभी विद्वतजन महाविद्यालय परिसर स्थित त्रिमूर्ति के पास स्वर्गीय पंडित गंगाधर मिश्र की प्रतिमा के पास पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किया। अतिथि स्वागत संयोजक प्रो इंदिरा झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डा आर एन चौरसिया ने किया।

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