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सुपौल/ नीतीश राज के विकास की हक़ीक़त : पिपरा में जुगाड़ का नाव बनी मजबूरी

✍️ अमरेश कुमार, सुपौल (बिहार)

पिपरा नगर पंचायत (घोषित) के क्षेत्र में जुगाड़ के नाव से घर पहुंचना बन गया लोगों की मजबूरी

 

पिपरा (सुपौल) : विकास के इस दौर में जब हर जगह सड़कों का जाल बिछ गया है। आलम यह है कि अब तो सड़क पर भी समय से पहले ही सड़क बनने लगी है। बाबजूद कई ऐसी जगहें भी हैं जहां सड़क के लिए लोग आज भी लालायित है। लेकिन विभागीय कायदों और नियमों के आगे लोग बेबस होकर सड़क की आस छोड़ देते हैं। खैर जो भी हो लेकिन आवाजाही के लिए सड़क बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकारी तंत्र को भी चाहिए कि सड़क जैसे मूलभूत सुविधा को लेकर त्वरित गति से निर्णय कर लोगों को इसका लाभ दिलवाया जाय। आज जो तश्वीर हम दिखाने जा रहे हैं वो आधुनिकता के इस दौर में बदलते बिहार की अनछुई वर्तमान को दर्शा रही है।
यहां सड़क नहीं बना कोई बात नहीं पर काश ऊंची पगडंडी भी रहती तो इस जुगाड़ के नाव का सहारा लोगों को नहीं लेना पड़ता। आपदा आती है और नियत समय पर चली भी जाती है। यह भी सच है कि आपदा से निपटने के लिए हर साल योजनाएं बनाई जाती है। और आपदा के कारण पीड़ित परिवारों को किसी तरह की परेशानी नही हो उसके लिए भी कार्य योजना तैयार कर हरसंभव मदद दिये जाते हैं। लोजी कहते हैं यह भी सच है कि किसे किस तरह की कितनी सहायता मिली इसका लेखा जोखा भी सरकारी फाइलों में कैद होकर रह जाता है। जमीनी स्तर पर जो चीज उभर कर रह जाती है वो है कुदरती कहर के जाने बाद छोड़े गए निशान। यहां हम ऐसी तस्वीर आपसे साझा करेंगे जिसे देख कर सोचने पर विवश होना पड़ेगा कि अगर नजरो के सामने ऐसी समस्या है। तो दूरदराज के इलाके में लोगों की समस्या का हश्र क्या होगा। यह कोई बाढ़ ग्रस्त इलाके की तस्वीर नहीं है। और न ही कोसी तटबंध के अंदर का जहां हर साल चार पांच महीने लबालब पानी भरा रहता है। यह तश्वीर पिपरा प्रखंड मुख्यालय बाजार के समीप की है। मालूम हो कि पिछले हाल के महीने में पिपरा को नगर पंचायत बनाए जाने की कवायद भी शुरू की गई। जिसके लिए औपचारिकताएं भी लगभग पूरी है। विभागीय सूत्र की माने तो पिपरा को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी हो गई है। बाबजूद ऐसी तश्वीरें सरकार के विकास संबंधी बातों को धुंधला करती दिख रही है।

यह तस्वीर बुधवार को ली गई है। लोग कहते हैं कि नगर पंचायत बनने के बाद पिपरा के लोगों को नई नई सुविधाएं मिलने वाली है। लेकिन इसके लिए पिपरा वासियों को थोड़े दिनों का इंतजार करना पड़ेगा। यह तश्वीर वार्ड नं 13 की है। एनएच 106 किनारे अवस्थित इस बस्ती के लोग पानी मे किस तरह अपने घर पहुंचते है। तस्वीर इसकी कहानी बयां कर रही है। बताया गया है कि इस जगह पांच से सात परिवारों का आशियाना है। लेकिन सड़क नहीं होने के कारण इन लोगों को बारिश के दिनों में काफी परेशानी के दौर से गुजरना पड़ता है। बारिश के कारण इनके घरों के इर्द गिर्द बारिश का पानी इस कदर जमा हो जाता है कि घरों के लोग टापू की तरह कैद हो जाते है। लिहाजा इन लोगों को अपने घर पहुँचने के लिए इन्हीं जुगाड़ के नावों का सहारा लेना पड़ता है। बिडम्बना यह है कि प्रखंड मुख्यालय बाजार के पास एनएच 106 सड़क किनारे अवस्थित इन परिबार के लोगों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। प्रखंड मुख्यालय पिपरा की यह तस्वीर जहां विकास आज भी आमलोगों की ज़िंदगी से कोसो दूर है। जीवन की जद्दोजहद में जुटे परिवार के लिए हाथ से बनाये गए इस नौका के सहारे ही जरूरतों को पूरा कर रहे है। चूंकि बारिश का पानी घर के आसपास बड़े बड़े गड्ढों में जमा है। लिहाजा जरा सी भी चूक हुई तो इनकी जीवन खतरे में पड़ सकती है। वावजूद इसके खतरे उठा कर भी लोग घर तक पहुचने के लिए जोखिम उठाने को तैयार है। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी बारिश का समय शुरू ही हुआ है। जब व्यापक पैमाने पर बारिश होगी तो इनलोगों की जिंदगी कैसे कटेगी यह सोचने वाली बात है। खास बात यह भी है कि ऐसे जुगाड़ के नाव के सहारे सफर करने से दुर्घटना भी घट सकती है। बड़ी बात यह है कि एनएच के किनारे अवस्थित इस बस्ती को हर दिन कोई न कोई वरीय अधिकारी निहारते होंगे लेकिन किसी ने इस ओर पहल करने की कवायद नहीं कर सकी है।

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