News4All

Latest Online Breaking News

डॉक्टर्स डे विशेष : धरती के भगवान होते हैं डॉक्टर्स

आज के भागदौड़ और अत्यंत व्यस्त जिंदगी में कोई भी इंसान शरीर से पूर्ण स्वस्थ्य और निरोगी जीवन नहीं जी पारहा है।सभी को कोई न कोई तकलीफ और रोग अवश्य है। इसका मुख्य कारण मानसिक रूक से परेशान रहना और संतुलित खानपान का ना होना, साथ ही साथ अनियमित दैनिक जीवन शैली का होना । यद्यपि वर्तमान में कोरोना काल के कारण थोड़ा भागदौड़ कम जरूर है किंतु रोजी रोटी के ऊपर पड़े आर्थिक प्रभाव के कारण इंसान और भी ज्यादा चिंतायुक्त तथा अवसादग्रस्त है। कोई न कोई समस्या सभी के सामने मुँह फैलाये खड़ी है। ऐसे में कोई भी पूर्णतयः स्वस्थ्य रह ही नहीं सकता।
किसान अगर धरती के हम सभी के अन्नदाता हैं तो डॉक्टर्स भी धरती के हमारे भगवान हैं। इन दोनों के बिना भी जीवन सुचारू रूप से नहीं चल सकता। हम अन्न के बिना तो कुछ दिन उपवास कर के भी जी सकते हैं किंतु शरीर में रोग लिए बीमार रह कर बिलकुल भी नहीं जी सकते हैं।

ऐसे में चिकित्सकों का परामर्श और रोगों के सही उपचार के लिए उनके साथ और सहयोग की सभी को नितांत आवश्यकता होती है। कोई भी व्यक्ति इस जीवन में चिकित्सक के बिना जीवित नहीं रह सकता। डॉक्टर्स हमें विभिन्न रोगों से अपने इलाज द्वारा आराम पहुँचाते हैं,ठीक करते हैं। हमारे इस जीवन की रक्षा करते हैं। इसी लिए डॉक्टर्स को धरती का भगवान कहा जाता है।

भारत में डॉक्टर्स डे मनाने के पीछे एक महत्वपूर्ण इतिहास है। डॉ.विधान चंद्र राय का जन्म बिहार के पटना (खजांची) में 01 जुलाई 1882 को हुआ था। अपनी प्रारंभिक पढ़ाई जारी रखते हुए आगे वह कोलकाता शहर के मेडिकल कालेज उन्होंने एम बी बी एस की डिग्री प्राप्त किया और उसके बाद लन्दन से डॉ.राय ने एम आर सी पी और एफ आर सी एस की उपाधि भी प्राप्त किया। तीनों उपाधियाँ प्राप्त करने के बाद 1911 में डॉ. राय एक चिकित्सक के रूप में भारत में अपने जीवन की शुरुआत किया। इसके बाद वे कोलकाता मेडिकल कालेज में व्याख्याता बने तथा वहां से वे कैंपबैल मेडिकल स्कूल और फिर कारमिकेल मेडिकल कालेज गये। उनकी ख्याति एक लब्ध प्रतिष्ठित चिकित्सक शिक्षक के रूप में तो थी ही महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में जुड़ने से एक विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में ज्यादा हुयी। भारतीय जनमानस के लिए उनके हृदय में अपार प्रेम और सामाजिक उत्थान की प्रबल भावना ने उन्हें भारतीय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया और डॉ. राय राजनीति में भी आ गये। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का गौरवमयी पद सम्हाला। डॉ.विधान चंद्र राय को बाद में भारत रत्न की सर्वोच्च उपाधि से भी सम्मानित किया गया। इस प्रकार डॉ. विधान चंद्र राय न सिर्फ एक महान चिकित्सक शिक्षक थे बल्कि वो एक महान सक्रिय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। वह पश्चिम बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री भी रहे। उन्ही के जन्म दिवस के विशेष सम्मान में प्रत्येक वर्ष 01 जुलाई को भारत में चिकित्सकों को सम्मान एवं उनके द्वारा किये गये मानवता की सेवा को धन्यवाद देने के लिए यह डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।

डॉक्टर्स जिस तरह से अपनी जान और परिवार की परवाह किये बिना आज कोरोना वायरस के इस संक्रमण काल में भी हमारी सेवा और इलाज में नित संकल्प के साथ रात दिन लगे हुए हैं और हमारी जान बचाने की हर संभव प्रयास करते हैं वह वास्तव में अतुलनीय है, सम्मान दिए जाने के योग्य है ,वंदनीय है, अभिनंदनीय है।

केंद्र सरकार ने 01 जुलाई 1991 से “डॉक्टर्स डे” मनाना शुरू किया। डॉक्टर्स डे पर प्रत्येक वर्ष की एक थीम होती है। भारत में जैसे प्रत्येक वर्ष 01 जुलाई को “नेशनल डॉक्टर्स डे” मनाया जाता है,उसी तरह अमेरिका में भी प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को “राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस” मनाया जाता है। यह दिवस हमारे डॉक्टर्स को उनके द्वारा दी गई सेवाओं के लिए उन्हें अपना आभार प्रकट करने के लिए, उन्हें सम्मान देने के लिए और उनका धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए मनाया जाता है। डॉक्टरों के प्रति हिंसा को लेकर जीरो सहनशीलता का नियम भी भारत सरकार द्वारा रखा गया है।

अंत में मैं केवल इतना ही कहना चाहूँगा की हमारे डॉक्टर्स सभी के लिए पूज्य और सम्माननीय हैं। हमें इनकी इज्जत करनी चाहिए, इन्हें सम्मान देना चाहिये। इनके कर्तव्यों और सेवाओं के लिए इन्हें धन्यवाद देना चाहिये। यद्यपि की कभी कभी सभी के साथ कुछ ऐसी भी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो ही जाती हैं, जब मन को जरूर बहुत कष्ट और क्लेश होता है किंतु फिर भी इनके साथ कभी दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिये। हमें उस स्थिति और उत्पन्न विषम परिस्थिति को हमारा प्रारब्ध और ईश्वर की मर्जी मान कर उस परिणाम को स्वीकार करते हुये संतोष करना चाहिये।शांति बनाये रखना चाहिये।