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दरभंगा/ प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा को श्रद्धांजलि देने हेतु शोक सभा का किया गया आयोजन

: न्यूज़ डेस्क :


गौरा बौराम (दरभंगा) : मैथिली साहित्य परिषद, बिरौल एवं कोचिंग एसोसिएशन बिरौल के तत्वावधान में एक शोक सभा का आयोजन प्रखण्ड के आसी गाँव में किया गया । मैथिली साहित्यकार उदय चंद्र लाल दास की अध्यक्षता में आयोजित इस शोक सभासभा में प्रख्यात वैज्ञानिक एवं भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर कलाम के सहकर्मी एवं मित्र पद्मश्री डॉ मानस बिहारी वर्मा को श्रद्धांजलि दी गई । सभा में सामाजिक दूरी तथा सरकार के द्वारा जारी किए गए कोरोना गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन किया गया । श्री दास ने डॉक्टर वर्मा के अविस्मरणीय वैज्ञानिक अनुसंधान एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला । डीआरडीओ के प्रोग्रामिंग डायरेक्टर के पद पर रहते हुए पद्मश्री वर्मा ने कई योजनाओं को मूर्तरूप देकर कीर्तिमान स्थापित किया । श्री दास ने आगे कहा की तेजस की सफलता अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा है ।

मौके पर पहुंचे कोचिंग एसोसिएशन के संरक्षक बलराम चौधरी ने कहा की सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जीवन का लक्ष्य ग्राम विकास और कंप्यूटर शिक्षा के प्रसार को बनाया । गांव प्रवास में आते ही उन्होंने अपने गांव बाउर को साक्षर बनाने का व्रत लिया । जब तक वहां के सभी नागरिक साक्षर नहीं हुए तब तक उन्होंने गांव में ही डेरा डाले रखा ।

कोचिंग एसोसिएशन बिरौल के अध्यक्ष केशव चौधरी ने कहा की डॉक्टर वर्मा अपने संसाधनों से सुसज्जित वाहन पर घूम घूम कर विज्ञान के चमत्कार से छात्र छात्राओं को प्रशिक्षित करते रहे । उनका यह कार्य हमारे क्षेत्र के बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ ।

कोचिंग एसोसिएशन बिरोल के सचिव अमरेश कुमार ने कहा कई राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित डॉक्टर वर्मा का जीवन एक ऋषि के समान था । ऐसा लगता है कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात को याद करके इनके पूर्वज इन्हें ऋषि जी के नाम से पुकारते थे ।

सभा में उपस्थित सभी वक्ताओं ने उनके निधन को राष्ट्रीय व अपूरणीय क्षति बताया । मौके पर राकेश कर्ण, मुरारी दास, निशिकांत, सौरव कुमार सुमन, घनश्याम झा, शिवम चौधरी, राजहंस दास, अनूप कुमार, बिभुतिभूषण, राजेश मिश्र, विनोद कमती, प्रभास कुमार, प्रियदर्शनी दास, रमन कुमार आदि उपस्थित थे ।