• Home
  • चंडीगढ़
  • चंडीगढ़/ प्रो. प्रांजल मोदी ने पीजीआईएमईआर (PGIMER) के सातवें ‘ट्रांसप्लांट सर्जरी ओरेशन’ में भरा जोश
Image

चंडीगढ़/ प्रो. प्रांजल मोदी ने पीजीआईएमईआर (PGIMER) के सातवें ‘ट्रांसप्लांट सर्जरी ओरेशन’ में भरा जोश

राष्ट्रीय सम्मेलन में परिवारों ने साझा की अंगदान की भावुक कहानियां

चंडीगढ़ : पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ ने ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसप्लांट सर्जन्स’ के दूसरे वार्षिक सम्मेलन के हिस्से के रूप में 7वें ट्रांसप्लांट सर्जरी ओरेशन की मेजबानी की। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों, प्रशिक्षुओं और परिवारों ने शिरकत की, जहाँ अंग प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांटेशन) के क्षेत्र में हुई प्रगति और इसके पीछे की मानवीय कहानियों पर प्रकाश डाला गया।

गुजरात यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रांसप्लांटेशन साइंसेज के कुलपति प्रो. प्रांजल मोदी ने “सिविल अस्पताल से ट्रांसप्लांट यूनिवर्सिटी तक : दृष्टि, दृढ़ता और नेतृत्व की एक यात्रा” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने सिविल अस्पताल अहमदाबाद को एक अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट केंद्र में बदलने के अपने उल्लेखनीय अनुभव साझा किए, जहाँ अब किडनी, लिवर और पैनक्रियाज का सफल प्रत्यारोपण किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्यारोपण किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षित टीम का सामूहिक प्रयास है। प्रो. मोदी ने बताया कि निरंतर प्रयासों के कारण 231 मृत दाताओं से लगभग 995 अंग और ऊतक (टिशू) दान प्राप्त करना संभव हो पाया है। उन्होंने रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट को सर्जिकल इनोवेशन का अगला भविष्य बताया।

उल्लेखनीय है कि प्रो. मोदी ने रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट की शुरुआत की है और उनके पास दुनिया में इसका सबसे बड़ा अनुभव है। उन्हें यूनाइटेड किंगडम सहित दुनिया के विभिन्न केंद्रों में ‘मिनिमली इनवेसिव’ किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

सभा का स्वागत करते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा, “ऐसे प्रतिष्ठित व्याख्यान शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं और वैश्विक स्तर के ट्रांसप्लांट कार्यक्रम बनाने की भारत की क्षमता की पुष्टि करते हैं।” रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने प्रो. मोदी की यात्रा को “दृढ़ता और नेतृत्व का एक ऐसा मॉडल बताया जो चिकित्सकों और युवा प्रशिक्षुओं को प्रेरित करता रहेगा।” कार्यक्रम का समापन डीन (अकादमिक) प्रो. आर. के. राठो द्वारा अभिनंदन और धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

सम्मेलन के दौरान शरीर रचना विभाग (Anatomy Department) के सहयोग से अंग निकालने (organ retrieval) पर एक ‘कैडेवर वर्कशॉप’, डायलिसिस एक्सेस पर सेमिनार और अंगदान व जीवन के अंतिम समय की देखभाल (end-of-life care) पर चर्चा की गई। इसमें 180 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत में प्रत्यारोपण के भविष्य को आकार देने वाली आधुनिक तकनीकों, नैतिक मुद्दों और नवाचारों पर विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों ने सर्जरी में रोबोटिक्स की भूमिका, अंगदान बढ़ाने की रणनीतियों और सरकारी अस्पतालों में मजबूत व्यवस्था निर्माण के महत्व पर भी चर्चा की।

बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने मृत्यु के बाद अंगदान बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया। प्रो. काजल जैन ने ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन और अंगदान से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सत्रों का आयोजन बेहद जरूरी है क्योंकि ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

बैठक का एक अन्य मुख्य आकर्षण ‘लाइफ सपोर्ट’ को वापस लेने (withdrawal of life support) पर चर्चा रही, विशेष रूप से ‘मरीज हरीश’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के संदर्भ में। दो परिवारों ने वर्षों पहले अपने बेटों के अंग दान करने के अपने गहरे मार्मिक अनुभव साझा किए । उनके अनुभवों ने रेखांकित किया कि दुख की घड़ी में डॉक्टरों द्वारा किया गया सहानुभूतिपूर्ण संवाद, परिवारों को अंगदान के लिए “हाँ” कहने के लिए प्रेरित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। ये कहानियाँ एक शक्तिशाली संदेश देती हैं कि एक मजबूत ट्रांसप्लांट प्रोग्राम बनाने के लिए सर्जिकल कौशल के साथ-साथ सहानुभूति और संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

7वें ट्रांसप्लांट सर्जरी ओरेशन और सम्मेलन की कार्यवाही ने इस विश्वास को दोहराया कि दूरदर्शी नेतृत्व, टीम वर्क, दृढ़ता और करुणामय संवाद देश में न्यायसंगत और विश्व स्तरीय ट्रांसप्लांट कार्यक्रम बनाने के आधार स्तंभ हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *