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शिमला/ बेटी नलिनी व ज्ञान सिंह जी के टीबी उन्मूलन प्रयासों का प्रधानमंत्री जी द्वारा सराहा जाना हिमाचलवासियों के लिए गर्व की बात : अनुराग ठाकुर

बेटी नलिनी व ज्ञान सिंह जी की कहानी देशवासियों को टीबी मुक्त भारत अभियान में प्रेरित करेगी : अनुराग ठाकुर

मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने हिमाचल के ऊना की 7 वर्षीय नलिनी के टीवी जागरूकता अभियान को सराहा

प्रधानमंत्री ने किन्नौर के ग्राम पंचायत प्रधान ज्ञान सिंह के टीबी उन्मूलन प्रयासों को भी सराहा

शिमला : केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल व युवा कार्यक्रम मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में टीबी उन्मूलन की दिशा में हिमाचल प्रदेश की 7 वर्षीय बेटी नलिनी व किन्नौर के ग्राम पंचायत प्रधान श्री ज्ञान सिंह के प्रयासों को सराहने को हिमाचल के लिए गर्व का अवसर बताते हुए इससे अन्य लोगों को प्रेरणा मिलने की बात कही है।

आनुराग ठाकुर ने कहा “ आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन का आह्वाहन किया है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने कल अपने 102वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भारत को टीवी मुक्त बनाने की बात पर विशेष बल दिया है। इस दौरान उन्होंने देशवासियों के साथ देश में टीबी के खिलाफ मुहिम में लगे लोगों की सराहना की। प्रधानमंत्री जी ने इस बीच मेरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के ऊना जिले की रहने वाली 7 वर्षीय नलिनी सिंह व किन्नौर की एक ग्राम पंचायत के प्रधान निक्षय मित्र श्री ज्ञान सिंह जी के टीबी उन्मूलन प्रयासों को सराहा और उनके कार्यों को देश के समक्ष रखा। यह हर हिमाचलवासियों के लिए गर्व की बात है”

श्री ठाकुर ने कहा, “बेटी नलिनी व ज्ञान सिंह जी की ये कहानी देशवासियों को टीबी मुक्त भारत अभियान में अपनी भागीदारी देने के लिए प्रेरित करेगी। आप दोनों पर देवभूमि को गर्व है। इससे पूर्व भी मन की बात के कई एपिसोड्स में प्रधानमंत्री जी ने हिमाचल प्रदेश में लोगों द्वारा किए जा रहे जनकल्याण के कार्यों की सराहना की है। प्रधानमंत्री जी ने अपने मन की बात के 100वें एपिसोड में भी हिमाचल के अलग-अलग इलाकों में साफ-सफाई के लिए ‘हीलिंग हिमालय’ नाम से अभियान चला रहे प्रदीप सांगवान से बात की थी। इससे पूर्व अपने 95वें एपिसोड में भी प्रधानमंत्री जी ने हिमाचल के सोलन स्थित मस्कुलर डिस्ट्राफी पुनर्वास केंद्र “मानव मंदिर’ और किन्नौर जिला में ड्रोन से सेब ढुलाई पर चर्चा की थी”

3 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ यह कार्यक्रम महिलाओं, युवाओं और किसानों जैसे कई सामाजिक समूहों को संबोधित करते हुए सरकार के नागरिक-पहुंच कार्यक्रम का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है और इसने सामुदायिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया है. प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए भारत समेत दुनिया की ऐसी कई शख्सियतों को खोजा, जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशेष योगदान दिया, लेकिन उनके योगदान का पता नहीं चला। आज समाज में ऐसे लोगों को लोग सिर्फ जानते हीं नहीं हैं बल्कि उनसे प्रेरणा लेकर आगे भी बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा पीएम मोदी ने मन की बात में जलवायु परिवर्तन, कृषि, कला, संस्कृति और स्वास्थ्य सभी विषयों को शामिल किया और अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हर बार समाज के सामने कुछ नया पेश किया ताकि समाज को उसकी जानकारी मिल सके।

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