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दरभंगा/ सी एम कॉलेज के महिला कोषांग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समारोह आयोजित

✍️ हरिमोहन चौधरी, दरभंगा (बिहार)

महिलाओं को पूर्णत: समानता का दर्जा देना ही इस दिवस का मूल उद्देश्य- प्रो डोली सिन्हा

समारोह में राधा देवी,अमृता रानी,जयंती मिश्रा,सुनीता देवी तथा खदीजा खातून को प्रतिकुलपति ने किया सम्मानित

यदि दृढ़ इच्छाशक्ति,कड़ी मेहनत तथा उचित प्लानिंग हो तो हर सफलता की होगी प्राप्ति- प्रतिकुलपति

सी एम कॉलेज परिवार ने छात्राओं के लिए महिला छात्रावास बनाने का लिया संकल्प

दरभंगा : हमारी जिंदगी में हमेशा चुनौतियां आती रहती हैं,परंतु हमें न डरते हुए उनका डटकर सामना करना चाहिए।यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत तथा उचित प्लानिंग हो तो हर तरह की सफलता निश्चय ही मिलती है। हमारे अंदर सब कुछ है,बस उसे पहचानने की जरूरत है। हमें सदा खुश रहते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। उक्त बातें मिथिला विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति प्रो डोली सिन्हा ने सी एम कॉलेज, दरभंगा में महाविद्यालय के महिला कोषांग के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी सह सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कहा। उन्होंने छात्राओं को भारत की अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के जीवन की वास्तविक दुर्घटना की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि अरुणिमा वॉलीबॉल में भारत का 7 बार प्रतिनिधित्व किया और अपने जीवन से संघर्ष करते हुए 11 अप्रैल, 2011 को बाएं पैर को काट दिए जाने पर भी 13 मई, 2013 को कृत्रिम पैर व अंगों के सहारे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला बनी जो सबों के लिए प्रेरणादायक है।

प्रो सिन्हा ने कहा कि मैं सी एम कॉलेज से काफी पहले से ही जुड़ी हूं,परंतु आज तक मुझे इस महाविद्यालय की कोई शिकायत सुनने का मौका नहीं मिला है। यहां सभी शिक्षिकाएं एवं छात्राएं पूरी तरह सुरक्षित एवं मर्यादित हैं।
इस अवसर पर प्रतिकुलपति ने कोरोना काल में अपने परिवार तथा पति की आय खत्म हो जाने के बाद भी संघर्षरत रहते हुए अपने पूरे परिवार का भरण- पोषण कर समाज में अपनी पहचान बनाने वाली 5 महिलाओं-राधा देवी, अमृता रानी, जयंती मिश्रा, सुनीता देवी तथा खतीजा खातून को पुष्पगुच्छ, शौल तथा पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं एवं महिला शिक्षकेतर कर्मियों को भी प्रतिकुलपति ने शौल तथा पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।

समारोह में प्रो मंजू राय, प्रो शिप्रा सिन्हा, डा प्रीति कनोडिया, प्रो रितिका मोर्या, डा पूनम कुमारी, डा अभिलाषा कुमारी, डा रीना कुमारी, डा चंदा कुमारी, डा तनिमा कुमारी, डा दिव्या शर्मा, स्नेहा अग्रवाल, डा मसरूर सोगरा, डा नेफासत कमाली, सुधा कुमारी, निधि कुमारी, अर्चना कुमारी, डा जफर आलम, डा नरेंद्र झा, डा आर एन चौरसिया, डा संजीत कुमार झा, डा अखिलेश कुमार विभु, डा मनोज कुमार सिंह, डा रुद्रकांत अमर, डा बासुदेव साहू, प्रो संजीव कुमार, डा आलोक कुमार, डा अब्दुल हई, डा मयंक श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे । छात्रों की ओर से श्रया किरण, अनुष्का, अमरजीत कुमार, नीरज कुमार आदि ने सक्रिय रूप से सहयोग किया।

डा राफिया काजिम के संचालन में आयोजित समारोह में धन्यवाद ज्ञापन प्रो रागनी रंजन ने किया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न, शौल तथा पौधा प्रदान कर किया गया जबकि स्वागत गान अंग्रेजी विभाग की छात्राओं ने प्रस्तुत किया।

अतिथियो का स्वागत करते हुए महिला कोषांग की संयोजिका प्रो इंदिरा झा ने कहा कि प्रति कुलपति सफल महिला के रूप में दूसरों के लिए रोल मॉडल हैं। आज कोरोना काल में संघर्ष करते हुए दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा, कपड़ा-बर्तन, खाना बनाना, चाय दुकान चलाना तथा नैपकिन आदि बनाकर अपने घर-परिवार को न केवल शारीरिक, बल्कि आर्थिक रूप से सबल बना कर दूसरों के लिए भी प्रेरक बनी यह महिलाएं समाज की गौरव हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि यह ऐतिहासिक कार्यक्रम है,जिसमें बिल्कुल ही आम महिलाओं को सम्मानित किया गया है।ऐसी महिलाओं के कार्यों के प्रति हम नतमस्तक हैं। आज महिलाएं दया की पात्र नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की पात्र हैं। हमें अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि वे महिलाओं को प्रतिष्ठा दे। यदि घर में मां बीमार हो जाए तो पूरा परिवार लड़खड़ा जाता है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने महाविद्यालय परिवार की ओर से महिला छात्रावास बनाने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि जब इनकी सुरक्षा एवं सम्मान घर से लेकर बाहर तक होगा, तभी हमारा समाज आगे बढ़ेगा। मैथिली विभागाध्यक्षा प्रो रागिनी रंजन ने “मैं आज के युग की नारी हूं” शीर्षक कविता का पाठ किया, जबकि सम्मानित महिलाएं महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। डा प्रीति कनोडिया ने अतिथियों का विस्तार से परिचय कराते हुए कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित किया।