चंडीगढ़ : उच्च रक्तचाप के इलाज के क्षेत्र में पीजीआई ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। पीजीआई के एडवांस्ड कार्डियोलॉजी सेंटर में पहली बार सफलतापूर्वक रीनल डिनर्वेशन (RDN) प्रक्रिया की गई। यह प्रक्रिया डॉ. सौरभ मेहरोत्रा, प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा डॉ. यश पाल शर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी विभाग के मार्गदर्शन में की गई।

यह प्रक्रिया 48 वर्षीय ऐसे मरीज पर की गई, जो लंबे समय से उच्च रक्तचाप से पीड़ित था। मरीज को कई दवाएं दी जा रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उसका ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो पा रहा था। लगभग दो सप्ताह तक मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया, लेकिन दवाओं से भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
मरीज की कम उम्र और दवाओं के असर न करने के कारण डॉक्टरों ने रीनल डिनर्वेशन करने का निर्णय लिया। यह एक सरल और कम चीरा लगाने वाली कैथेटर आधारित प्रक्रिया है, जिसमें किडनी की धमनियों के आसपास मौजूद नसों को नियंत्रित किया जाता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं।
यह प्रक्रिया बिना किसी स्थायी इम्प्लांट के, रेडियोफ्रीक्वेंसी तकनीक की मदद से की जाती है। पूरी प्रक्रिया सफल रही और किसी प्रकार की कोई जटिलता नहीं आई। वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर है और उसका रक्तचाप पहले से बेहतर नियंत्रण में है।
इस अवसर पर डॉ. सौरभ मेहरोत्रा ने बताया कि रीनल डिनर्वेशन उन मरीजों के लिए एक नया और प्रभावी विकल्प है, जिनका ब्लड प्रेशर दवाओं के बावजूद नियंत्रित नहीं हो पाता, खासकर युवा मरीजों में यह तकनीक भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकती है।
यह सफलता पीजीआईएमईआर की उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।















