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चंडीगढ़/ केंद्रीय बजट 2026 – 27 को लेकर आंत्रप्रेन्योर के. एस. भाटिया की उम्मीद – स्टार्टअप निवेश पर ज़ीरो कैपिटल गेन्स टैक्स से मजबूत होगा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम

रविवार, 1 फरवरी को संसद में पेश होगा आगामी वित्त वर्ष का केंद्रीय बजट

चंडीगढ़, 31 जनवरी 2026 : चंडीगढ़ कैपिटल रीजन स्थित मिस्टर. प्रॉपटेक के जाने-माने सीरियल आंत्रप्रेन्योर और को- फाउंडर के. एस. भाटिया ने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में भारतीय स्टार्टअप में निवेश करने वाले एंजल इन्वेस्टर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट्स और फैमिली ऑफिसेज़ के लिए ज़ीरो कैपिटल गेन्स टैक्स जैसी महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती हैं। भाटिया का मानना है कि ऐसी साहसिक और दूरदर्शी नीति भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नए आयाम देगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसी रविवार, 1 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी।

भाटिया के अनुसार, स्टार्टअप निवेश पर कैपिटल gains टैक्स को समाप्त करने से घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप में पूंजी प्रवाह तेज़ी से बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह कदम निवेशकों में नया विश्वास जगाएगा और उन्हें अधिक सक्रिय रूप से स्टार्टअप में निवेश के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने कहा, “भारत में एक वाइब्रेंट स्टार्टअप कल्चर मौजूद है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता को खुलकर सामने लाने के लिए निवेशक-अनुकूल माहौल बनाना आवश्यक है। स्टार्टअप निवेश पर ज़ीरो कैपिटल गेन्स टैक्स एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।”

भाटिया का मानना है कि ऐसी नीति भारतीय कॉर्पोरेट्स और सफल आंत्रप्रेन्योर्स को भी दर्शक बने रहने के बजाय सक्रिय निवेशक की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगी। अनुभवी बिज़नेस लीडर्स की भागीदारी न केवल फंडिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगी, बल्कि उभरते स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन, बेहतर गवर्नेंस और रणनीतिक सपोर्ट भी प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ पूंजी निवेश टेक्नोलॉजी, रियल एस्टेट सर्विसेज, फिनटेक, क्लीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से इनोवेशन, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और हाई-ग्रोथ वेंचर्स के विस्तार को गति देगा।

भाटिया ने आगे कहा, “स्टार्टअप आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन हैं। प्रगतिशील टैक्स नीतियाँ व्यापक अर्थव्यवस्था में मल्टीप्लायर प्रभाव पैदा करेंगी।”

भारत को एक वैश्विक इनोवेशन हब बनाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ तालमेल रखने के लिए दूरदर्शी वित्तीय सुधार ज़रूरी हैं।

अंत में उन्होंने कहा, “वास्तव में निवेशक-अनुकूल वातावरण तैयार करके भारत दीर्घकाल में विशाल पूंजी आकर्षित कर सकता है और अपनी स्टार्टअप लीडरशिप को और मजबूत बना सकता है” ।

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