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चंडीगढ़/ अस्वास्थ्यकर पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर “चेतावनी” अनिवार्य तौर पर अंकित किया जाए

✍️ सोहन रावत, चंडीगढ़

जंक फूड के नुकसान से बचाने के लिए प्रमुख भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता निकायों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा

चंडीगढ़ : न्यूट्रिशन एडवोकेसी इन पब्लिक इंटरेस्ट (एनएपीआई) द्वारा आज ‘अस्वस्थ खाद्य/पेय उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (एफओपीएल)’ पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए अपना वक्तव्य जारी किया है।

डॉ.अरुण गुप्ता, कन्वीनर, न्यूट्रिशन एडवोकेसी इन पब्लिक इंटरेस्ट (एनएपीआई) ने पोजीशन स्टेटमेंट पेश करते हुए कहा कि ‘‘एनएपीआई में हम मानते हैं कि एफएसएसएआई अपने दृष्टिकोण और अस्वास्थ्यकर खाद्य और पेय उत्पादों पर ‘हेल्थ स्टार रेटिंग’ को शामिल करने के निर्णय दोनों में गलत हो गया है। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि देश भर के प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता निकाय इस गैर-जिम्मेदाराना कदम के खिलाफ एक साथ आए हैं।’’

सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने वाले 22 भारतीय संगठनों द्वारा समर्थित, यह बयान भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की हाल ही में घोषित योजनाओं का कड़ा विरोध करता है, जिसमें ‘वार्निंग लेबल’ के बजाय ‘हेल्थ स्टार रेटिंग’ (एचएसआर) को नमक, चीनी या वसा में उच्च पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के लिए ऑफ-पैक लेबल फ्रंट के रूप में अपनाया जाए।

आशिम सान्याल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कंज्यूमर वॉयस कहा कि ‘‘हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सात साल की लंबी लड़ाई को हरा देगा और उन्हें स्वस्थ विकल्पों के अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा। हेल्थ स्टार रेटिंग (एचएसआर) उपभोक्ताओं को गलत सूचना देगी और उद्योग को अपने उत्पादों में सुधार के लिए बाध्य नहीं करेगी। दूसरी ओर, एक चेतावनी लेबल अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के उपभोक्ताओं द्वारा तत्काल पहचान है। स्वस्थ खाद्य पदार्थ चुनने के बारे में निर्णय लेने के लिए उपभोक्ताओं को एक हितधारक बनना चाहिए।’’

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के अध्यक्ष प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने बयान जारी करते हुए कहा कि ‘‘पैकेज्ड खाद्य उत्पाद, जो अस्वास्थ्यकर वसा, नमक या चीनी में उच्च होते हैं और जिनमें से कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड होते हैं, स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं-प्रतिरक्षा को कम करने से लेकर हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ाने तक हैं।’’

प्रो.रेड्डी ने कहा कि ‘‘स्टार रेटिंग भ्रामक हो सकती है, क्योंकि वे उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से सूचित नहीं करते हैं कि रेटिंग विशिष्ट घटकों, स्वाद या शेल्फ लाइफ के लिए है या नहीं। किसी भी पैकेज्ड खाद्य उत्पाद से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को आंकने का उपभोक्ता का अधिकार स्टार रेटिंग द्वारा प्रदान नहीं किया जाता है।’’

समर्थन करने वाले संगठनों के परामर्श से एनएपीआई द्वारा विकसित, यह संयुक्त बयान एफएसएसएआई की ‘हेल्थ स्टार रेटिंग’ के साथ आगे बढऩे की घोषणा की बढ़ती आलोचना को जोड़ता है, जो भारतीय उपभोक्ता को गुमराह कर सकता है।

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