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चंडीगढ़/ अंतरराष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञ ने हरियाणा में वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के प्रोसेस में गड़बडियों को किया उजागर

सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञ (रोड सेफ्टी एक्सपर्ट) ने परिवहन मंत्री से दखल देने की मांग की

खराब सुविधाओं वाले सेंटर्स के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाए; सेंटर्स के टेंडर्स फिर से निकाले जाएं

 

चंडीगढ़ :: डॉ. कमल सोई, अंतरराष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञ और नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल के सदस्य, ने कल कहा कि हरियाणा के परिवहन मंत्री ने उनको राज्य की सडक़ों पर चलने वाले वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने वाले खराब सेंटर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया है। साथ ही अगले दो माह के भीतर पीपीपी के आधार पर जारी किए जाने वाले टेंडर को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

यहां चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में वैधानिक नियमों को लागू करने में पेश आ रहे मुद्दों को एक बार फिर से सभी के सामने रखा। इन कमियों ने मोटर वाहन अधिनियम, 1998 की धारा 56 को प्रभावी ढंग से लागू करने में बाधाएं पैदा कर दी हैं।

सोई ने कहा कि ‘‘पिछले दिनों हरियाणा के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के साथ अपनी बैठक के दौरान, मैंने इस बात को सामने रखा था कि इन कमियों के कारण राज्य को प्रति माह 6 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसलिए जुलाई 2021 से राज्य के खजाने को अब तक 60 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है। सरकार द्वारा पीपीपी पर इनके साथ आने से यह पहले से अधिक राजस्व उत्पन्न करेगा और बेहद कीमती मानव जीवन को भी अधिक संख्या में बचाएगा।’’

उन्होंने कहा, उन्होंने पिछले साल 24 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हरियाणा परिवहन आयुक्त द्वारा जारी 23 जून, 2021 के एक आदेश के अनुसार, हरियाणा राज्य भर के सभी डीटीओ सह-आरटीए को डीलरों को अधिकृत करने का निर्देश दिया गया है। वाहनों के फिटनेस टेस्ट के संचालन के लिए ओईएम “अधिकृत टेस्टिंग स्टेशंस” के रूप में काम करेंगे। प्रत्येक अधिकृत टेस्टिंग स्टेशन उन वाहनों के निर्माण के लिए तय होगा जिन्हें डीलर अधिकृत डीलर के रूप में बेचता है।

उन्होंने कहा कि ‘‘मेरी अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, मैंने माननीय परिवहन मंत्री, हरियाणा और परिवहन आयुक्त हरियाणा को वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में गलत प्रक्रियाओं के संबंध में 30 अक्टूबर, 2021 और 28 दिसंबर, 2021 को दो ज्ञापन भी दिए थे।’’

परिवहन विभाग ने ओईएम के विभिन्न डीलरों को वाहनों का फिटनेस टेस्ट करने और इन वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 72 अथॉरिटी पत्र जारी किए थे। इन डीलरों के पास सीएमवीआर में निर्धारित आवश्यक टेस्टिंग उपकरण ही नहीं थे और उसके बावजूद उन्होंने वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करना शुरू कर दिया है जो कि भारत सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का सरासर उल्लंघन है।

सोई ने कहा कि ‘‘मैंने अतिरिक्त सचिव (परिवहन), एमओआरटीएच से भी मुलाकात की और उन्हें हरियाणा राज्य में वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में वैधानिक नियम को लागू करने में बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ों और अनियमितताओं के बारे में अवगत कराया।’’

एमओआरटीएच ने तब राज्य परिवहन विभाग को लिखा था और जब मैं माननीय परिवहन मंत्री हरियाणा से मिला तो उन्होंने मुझे बताया कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए एक कार्यदल बनाने की योजना बना रहे हैं और मुझे इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

इसके आधार पर माननीय मंत्री जी ने मुझे और अन्य हितधारकों को कल एक बैठक के लिए बुलाया। वह इसको लेकर काफी पॉजिटिव थे और उन्होंने मेरे सुझावों को स्वीकार किया और सहमति व्यक्त की कि वे प्राइवेट गैरेज और ओईएम को दिए गए इन सेंटर्स को बंद करने पर तुरंत कार्रवाई शुरू करेंगे। कल होने वाली सचिवों की उच्चस्तरीय बैठक में इस पर चर्चा होगी और उसके बाद इस संबंध में टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। यदि कल इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता है तो वह इसके लिए अगले सप्ताह से दस दिनों में एक विशेष बैठक कर टेंडर का निपटारा करेंगे और इसे तुरंत आगे बढ़ाएंगे और अधिकतम 9 महीनों में इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करेंगे।

सोई ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में मेरी प्रमुख चिंता यह है कि सडक़ों पर अपनी समय सीमा पूरी कर चुके अनुपयुक्त मोटर वाहनों का चलना हाल के दिनों में सडक़ दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है।

मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि कृपया इस मामले में हस्तक्षेप करें और आदेश दें कि वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए केवल सही और नियमों का पालन करने वाल प्रणाली ही काम करें। इसके साथ ही मैं मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि व्हीकल ओईएम के डीलरों को वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने, फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए दी गई अनुमति को रद्द करने का आदेश दें। सोई ने कहा कि यहां तक कि 40 साल पुराने कबाड़ हो चुके वाहनों को भी फिटनेस सर्टीफिकेट प्रदान किए जा रहे हैं। काफी मामलों में तो वाहनों को फिटनेस सेंटरों पर बुलाए बिना प्रमाण पत्र दिया जा रहा है।”

सडक़ हादसों में देश के 10 प्रमुख शहरों में हरियाणा 8वें नंबर पर

आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा की सडक़ों पर खस्ताहाल वाहनों के चलने के कारण प्रतिदिन दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और उसी के कारण हरियाणा 2020 में सडक़ हादसों वाले देश के प्रमुख 10 शहरों की रैंकिंग में रैंक नंबर 8 पर आ गया है। इसके अलावा, भारत में सडक़ दुर्घटनाओं के लिए एनसीआरबी की रिपोर्ट – 2020 के अनुसार दुर्घटनाओं के मामले में शीर्ष 10 राज्यों की जांच से पता चलता है कि 2020 में भारत के स्तर पर कुल दुर्घटनाओं का लगभग 22 वां हिस्सा है, जहां भी हरियाणा राज्य 8 वें रैंक पर है। यह भी देखा गया है कि हरियाणा राज्य में मौत के मामले वाली सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या 9506 थीं। कानून प्रवर्तन में विफलता के कारण पिछले वर्षों की तुलना में काफी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2020 में इन हादसों में लगभग 4631 लोगों की मौत हुई। हरियाणा उन शीर्ष 15 राज्यों में है जहां दुर्घटनाएं और मृत्यु दर में वृद्धि हुई है। अवैध वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र के अभाव में सडक़ दुर्घटनाओं के दुर्भाग्यपूर्ण पीडि़तों को बीमा दावों के निपटान और उचित मुआवजा प्राप्त करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।