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नई दिल्ली/ विश्व जैव ईंधन दिवस पर वेबिनार का किया गया आयोजन

: न्यूज़ डेस्क :

जीईएफ-एमएनआरई-यूएनआईडीओ ने कर्ज पर ब्याज सबवेंशन योजना शुरू की, योजना से औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा

इस मौके पर जैविक कचरे के लिए जीआईएस आधारित इन्वेंट्री टूल को भी पेश किया गया

अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल के जरिए शहरी और औद्योगिक जैविक कचरे को बाजार के लिए उपयोगी बनाना और उसे बढ़ावा देने का लक्ष्य

नई दिल्ली : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जीईएफ-एमएनआरई-यूएनआईडीओ के साथ मिलकर, कर्ज पर ब्याज सब्सिडी स्कीम लांच की है। स्कीम के तहत औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इस मौके पर जैविक कचरे के लिए जीआईएस आधारित इनवेंट्री टूल को भी पेश किया गया।

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) और भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ग्लोबल इनवॉयरमेंट फेसेलिटी (जीईएफ) द्वारा वित्त पोषित कर्ज पर ब्याज सबवेंशन योजना शुरू की है। स्कीम के तहत औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल पेश करने के लिए छूट के साथ कर्ज दिया जाएगा। औद्योगिक जैविक कचरे को ऊर्जा बॉयोमेथेनेशन प्रोजेक्ट में परिवर्तित करने के लिए आम तौर पर ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है। इसके अलावा इन प्रोजेक्ट की ऑपरेशन लागत भी ज्यादा होती है। साथ ही कचरे की उपलब्धता, रेवन्यू भी एक चुनौती होती है। इसके अलाव प्रोजेक्ट के जरिए निकलने वाली बॉयोगैस और उसकी उपयोगिता भी काफी संवेदनशील होती है। ऐसी परियोजनाओं में इन्नोवेशन के जरिए न केवल ऊर्जा की उत्पादकता में सुधार हो सकता है बल्कि उसके जरिए ऊर्जा उत्पादन की लागत कम से कम हो सकती है। लेकिन प्रोजेक्ट को स्थापित करने के प्रारंभिक चरण में प्रारंभिक परियोजना लागत में वृद्धि भी हो सकती है। हालांकि लंबी अवधि में जहां परिचालन लागत घटती है वही राजस्व में वृद्धि हो सकती है। यह ऋण स्कीम, लाभार्थियों को ऐसी परियोजनाओं के सामने आने वाले कर्ज पर ब्याज के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

वेबिनार के दौरान जीईएफ-एमएनआरई-यूएनआईडीओ परियोजना के तहत विकसित जैविक कचरे के लिए जीआईएस आधारित इनवेंट्री टूल को भी पेश किया गया। यह उपकरण पूरे भारत में उपलब्ध शहरी और औद्योगिक जैविक कचरे और उनकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता के जिला स्तर का आकलन प्रदान करेगा। जीआईएस उपकरण एसएमई और परियोजना डेवलपर्स को अपशिष्ट ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने में सक्षम करेगा और देश में अपशिष्ट से ऊर्जा क्षेत्र में बायोमेथेनेशन के तेजी से विकास की सुविधा प्रदान कर सकता है।

वेबिनार में भारत में बायोमेथेनेशन परियोजनाओं की सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया गया। और इसके बाद “बायोमेथेनेशन टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल में इनोवेशन – भारत में अपशिष्ट से ऊर्जा क्षेत्र के विकास की संभावनाओ” पर पैनल चर्चा हुई । इस दौरान प्रौद्योगिकी, व्यापार के अनुभव, भारत में इस क्षेत्र में एसएमई के योगदान को बढ़ावा देने के लिए मॉडल, नीतियां और नियामक ढांचा और परियोजनाओं को वित्तीय सहायता पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान भारत में यूएनआईडीओ के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रतिनिधि डॉ. रेने वैन बर्केल ने स्वागत भाषण दिया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री दिनेश दयानंद जगदाले ने उद्घाटन भाषण दिया और जैविक कचरे की उपलब्धता की मैपिंग के लिए वित्तीय सहायता योजना और जीआईएस टूल का शुभारंभ किया। इरेडा के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार दास ने मुख्य बातें बताईं। इसके बाद यूएनआईडीओ के राष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ श्री निखिल खोत ने औद्योगिक जैविक कचरे को इनोवेटिव ऊर्जा बॉयोमेथेनेशन प्रोजेक्ट और बिजनेस मॉडल के लिए लाई गई कर्ज पर ब्याज सबवेंशन स्कीम पर प्रस्तुति दी।

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