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प्रयागराज/ निराला साहित्य समूह द्वारा पावस ऋतु आधारित विशिष्ट वर्चुअल काव्य-गोष्ठी का किया गया आयोजन

: न्यूज़ डेस्क :

 

तुम्हीं हमारे जीवन की सच्ची अमिट कमाई हो…!

 

प्रयागराज : मंगलवार को आयोजित निराला साहित्य समूह की पावस ऋतु आधारित विशिष्ट वर्चुअल काव्य-गोष्ठी का शुभारंभ फर्रुखाबाद की सुप्रसिद्ध कवयित्री गुनगुन गुप्ता ने सुमधुर स्वर में की। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे भोपाल के मशहूर ग़ज़लकार देवेश देव ने बारिश की रुमानियत का वर्णन अपने ग़ज़ल के शेरों में कुछ ऐसे किया-

“जो आख़िर साथ जाना है वो पूँजी छोड़ देते हैं।
दया ईमां मुहब्बत और नेकी छोड़ देते हैं।।
सताती है हमे रह-रह के हर इक बूँद बारिश की,
कभी महबूब की जब आँख भीगी छोड़ देते हैं।।”

मुख्य अतिथि संजय सिंह भोपाल ने पावस ऋतु के अनुभव कुछ ऐसे अपने शेर में उकेरे-

“लगे सावन की जब झड़ियां उठे फ़ागुन में जब मस्ती।
फुहारों में उपस्थित मैं और मस्ती में तू बसती।।
समा बदला ज़मीं बदली ज़माने की हवा बदली।
कन्हैया ने कहा राधा न मैं बदला न तू बदली।।”

विशिष्ट अतिथि गुनगुन गुप्ता फर्रुखाबाद उ.प्र. ने अपने मुक्तकों गीतों से खूब वाहवाही लूटी। पावस की अगवानी में एक कजरी गीत उन्होंने पढ़ा-

“बरसे रिमझिम फुहार सखी सावन में।
बरसे रिमझिम फुहार, बजे मन के तार,
आई बाग़ में बहार सखी सखी सावन में।।”

पावस की विशिष्ट काव्य-गोष्ठी का उत्कृष्ट प्रवाहपूर्ण संचालन कर रही देश की सुविख्यात कवयित्री डॉ. लता ‘स्वरांजलि’ भोपाल ने पावस को वियोग श्रंगार-गीत पढ़कर ख़ूब दाद बटोरी-

” भीगे मौसम में हैं भीगे-भीगे नयन।
आ भी जाओ सजन, आ भी जाओ सजन।।
तेरे बिन सूने-सूने हैं मन प्रान तन।
आ भी जाओ सजन, आ भी जाओ सजन।।”

जबलपुर की कवयित्री विनीता पेगवार ने सावन गीत पढ़ा

“छा रही है घटा बहारों की,
बड़ी प्यारी अदा नज़ारों की,
गीत भी प्रीत के सहारे हैं।
भीगे सावन हसीन धारे हैं।।”

निराला साहित्य समूह के अध्यक्ष मुक्तप्राण सुधांशु पाण्डे ‘निराला’ ने पावस का आह्वान अपने गीत में पढ़कर समा बाँधा-

“काले-काले बादल में जैसे बूँद समाई हो।
तुम्हीं हमारे जीवन की सच्ची अमिट कमाई हो।।
सिर्फ़ तुम्हारे आने से पल्लव आये ठंडक आई,
चाहे जो कर दे बस कर दे फटे हुये मन की तुरपाई…”

कार्यक्रम के समापन पर आयोजक संस्था के अध्यक्ष सुधांशु पांडे “निराला” ने सभी रचनाकारों का आभार  प्रकट किया।।

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