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चंडीगढ़/ सिटी ब्यूटीफुल के बदसूरत पहलूओं को फ़ोटो प्रदर्शनी के माध्यम से किया गया उजागर

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खूबसूरत माने जाने वाले चंडीगढ़ शहर की बदसूरत तस्वीरों को किया गया प्रदर्शित

वॉरियर मॉम्स द्वारा आयोजित, प्रदर्शनी में डंपिंग ग्राउंड की तस्वीरें हैं जो इसके आसपास रहने वाले लोगों की दुर्दशा को उजागर करती हैं

चंडीगढ़ : शहर भर के कचरे का दिन प्रतिदिन बड़ा होता पहाड़, कचरे के ढेरों से उठती दुर्गंध के बीच जीते समाज और शहर में हाशिये पर रहने वाले लोग, अलग-अलग तरह के कचरे पर पनपने वाले जानवर, ये कुछ ऐसी भयावह तस्वीरें हैं जो शहर के अपने कचरे को समेटे हुए डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की हैंँ इस खूबसूरत शहर की पर्दे के पीछे की गंदगी को दिखाती अपनी तरह की इस पहली प्रदर्शनी का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया।

इस प्रदर्शनी का आयोजन पंजाब कला भवन में वॉरियर मॉम्स, मदर्स नेटवर्क फॉर क्लीन एयर द्वारा किया जाता है और इसका उद्घाटन भुलत्थ के कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने किया। वॉरियर मॉम्स शहर में हवा और अन्य सभी तरह के प्रदूषण को दूर करने के लिए प्रयासरत एनजीओ है। प्रदर्शनी शुक्रवार (7 अक्टूबर) से 9 अक्टूबर तक सुबह 11.30 बजे से शाम 6 बजे तक विजिटर्स के लिए खुली है। इसमें डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले समुदायों की दुर्दशा को दर्शाने वाले प्रसिद्ध फोटोग्राफर रितेश तकसांडे द्वारा खींची गई कई तस्वीरें हैं।

खैहरा ने कहा कि कचरा गिराने की जगहों पर सही इंतजाम नहीं होने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है और ऐसे में लैंडफिल और स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव के बारे में बातचीत को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल थी। कचरा जमा करने वाली जगहें इसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है क्योंकि हवा में जारी विषाक्त पदार्थों से श्वसन संबंधी विकार और त्वचा की बीमारियां होती हैं। जिम्मेदार नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में, हमें इस डंप से छुटकारा पाने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन यानि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर मिलकर काम करना चाहिए। और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कहीं और ऐसे डंप न बनाएं जाएं।’’

उन्होंने कहा कि ये फोटो प्रदर्शनी कचरा प्रबंधन के मुद्दे के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने में काफी अधिक मदद कर सकती है। इन तस्वीरों को चंडीगढ़ के सभी निवासियों या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा देखा जाना चाहिए, जिसने अभी तक यहां आसपास रहने वाले लोगों की समस्याओं को महसूस नहीं किया है और ना ही उनको ये अहसास हुआ है कि हमारे कचरे का उचित प्रबंधन करना अन्य सभी लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह के लैंडफिल हमारे देश को कई तरह के नुकसाान पहुंचाना बंद करें। इसके लिए हमें सबसे पहले मजबूत योजना बनानी होगी।

प्रदर्शनी के साथ ही ‘नो योअर राइट्स-अपने अधिकारों को जानें’ अभियान भी शुरू किया जा रहा है जो कि स्थानीय निवासियों को समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सही अधिकारियों के साथ कचरे और प्रदूषण से संबंधित मुद्दों को उठाने में मदद करेगा। इसका उद्घाटन प्रसिद्ध और वरिष्ठ पत्रकार और पंजाब के एक पूर्व विधायक कंवर संधू द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डड्डूमाजरा, सिटी ब्यूटीफुल का बदसूरत चेहरा है, जिसे कोई भी देखना पसंद नहीं करता है। यहां पर वेस्ट डंप पर एकत्र किए गए कचरे के ढेर शहर के कचरे के प्रबंधन में प्रशासन की सामूहिक विफलता को दर्शाते हैं।

वॉरियर मॉम्स ने ‘द डर्टी पिक्चर’ नामक एक फोटो प्रतियोगिता भी आयोजित की थी, जिसमें निवासियों से अपने पड़ोस में कचरे की समस्याओं को दर्शाने वाली तस्वीरें साझा करने के लिए कहा गया था। प्रतियोगिता को शानदार प्रतिक्रिया मिली और विजेता प्रविष्टियों को रविवार को राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ‘‘इस प्रतियोगिता में चंडीगढ़ के युवा निवासियों की भागीदारी देखना बहुत उत्साहजनक है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाएं और एक साथ काम करने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सब कुछ करें ताकि एक समुदाय के रूप में, हम अपने कचरे का बेहतर प्रबंधन कर सकें।’’

डड्डूमाजरा निवासी शिमला देवी ने कहा कि ‘‘यदि आप इस कॉलोनी में जाकर सर्वेक्षण करेंगे तो आपको ये पता चलेगा कि यहां हर कोई कचरे के कारण बीमार है। अधिकांश लोगों को कोई न कोई बीमारी लग चुकी है और वे त्वचा की समस्याएं, सांस लेने में परेशानी, बुखार, खांसी आदि से जूझ रहे हैं। इस डंपिंग ग्राउंड से बड़े और बच्चे सभी प्रभावित हैं। हमारी जिंदगी की काफी दुर्दशा हो चुकी है और हालात वास्तव में काफी खराब हो चुके हैं।’’

प्रदर्शनी का आयोजन करने वाली पंजाब की एक वॉरियम मॉम समिता कौर ने कहा कि ‘‘चंडीगढ़, राजधानी होने के बावजूद भी खराब कचरा प्रबंधन वाले शहरों की श्रेणी में आता है। माताओं के रूप में, हम यह देखकर चौंक गए हैं कि कचरा प्रबंधन चेन का अंत घर पर ही कचरे को अलग अलग करने की प्रक्रिया के बिल्कुल विपरीत है जिसका नागरिक परिश्रम से पालन कर रहे हैं। क्योंकि यहां पर आकर तो सारा कचरा एक साथ ही डम्प कर दिया जाता है। हमारी मुख्य चिंता ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 पर सही तरह से अमल करने के संबंध में है। नगर निगम चंडीगढ़ और नागरिकों द्वारा व्यापक प्रयासों और व्यावहारिक समाधान के लिए इस कचरे के पहाड़ की समस्या को हल करने की आवश्यकता है।

फोटो प्रदर्शनी के आयोजकों में से एक नवनीत चीमा, पंजाब की एक और वॉरियर मॉम, ने कहा कि ‘‘डड्डूूमाजरा चंडीगढ़ प्रशासन के एक अनाथ बच्चे की तरह लगता है, जिसकी कोई नहीं सुनता है और जहां रहने वाले एक वोट बैंक के तौर पर ही देखे जाते हैं। हर बार चुनाव के समय जहां के लोगों से बार-बार झूठे वादे किए जाते हैं और चुनाव के तुरंत बाद उन वादों और लोगों को भुला दिया जाता है। अधिकारियों द्वारा कचरे का प्रबंधन करने के लिए सीखने के लिए विभिन्न शहरों में जाकर किए जाने वाले स्टडी टुअर्स का कोई वास्तविक परिणाम भी नहीं दिख रहा है। अगर कोई परिणाम होता तो कम से कम यहां पर सफाई प्रबंधन बेहतर होता।’’

वारियर मॉम्स बीते काफी समय से लगातार डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा उठाती रही हैं और इस मुद्दे पर चंडीगढ़ नगर निगम को कई बार पत्र भी लिख चुकी हैं।

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