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आज़ादी का अमृत महोत्सव के उपर केंद्रित रविवासरीय बतकही

✍️ नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान


ककुवा ने प्रपंच का अगाज करते हुए कहा- सांचु कही तौ आजु परपंचु करय क हमार तनुकव मन नाइ हय। बसि, जीव यहै कहत हय कि उठाई साइकिल अउ सगरी जवार घूमी। घर-घर अउ गांव-गांव तिरंगा लहरात देखि। लोगन केरी आँखिन म राष्ट्रभक्ति हिलोर लेत देखि। हम काल्हि शुक का बड़ी बाजार भुट्टा बेचय गयेन रहय। अब हम का बताई। कसम ते उह नजारा जिंदगिम कबहुँ नाय द्याखा रहय। सगरा कस्बा तिरंगे ते रंगा रहय। रस्तम दुई ठौरी तिरंगा रैली निकरी। उहिमा न जानी कतनी फिटफिटी अउ मोटरय रहयं। जवान लरिका-बिटियन क्यारु जोश द्याखाय वाला रहय। सब जने भारत माता की जय, वंदेमातरम, हिन्दुस्तान जिंदाबाद-जिंदाबाद केर गगनभेदी नारा लगावत जात रहयं। युहु सब देखि क हमारव रोवां ठाड़ होइगे। बाजार पहुंचतय खन सड़क पर जामु लागि गा। हुंवा, कन्या पाठशाला केरी दुई सौ बिटवनी तिरंगा लैके पइदर मार्च कय रही रहयं। फिरि भइय्या, हमरेव राष्ट्रभक्ति जाग गवै। हम अपन हाफ-डाला सड़कय रोकवाय देहन। दुई-दुई भुट्टा सगरी बिटियन म बांट देहन। भारत माता की जय केर नारा लगवाय क घरय लौटि आयेन।


चतुरी चाचा अपने प्रपंच चबूतरे पर आज बड़े प्रसन्न मुद्रा में विराजमान थे। चबूतरे पर मिठाई के कई डिब्बे रखे थे। चबूतरे के पास पड़ी एक मेज पर तिरंगा झंडा बड़े करीने से रखा था। आज मौसम बड़ा सुहावना था। ककुवा, कासिम चचा, मुंशीजी, बड़के दद्दा, बड़को व नदियारा भौजी सब प्रधान जी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आज गांव के सभी बच्चे चबूतरे के सामने पेड़ों की घनी छाया में पंक्तिबद्ध बैठे थे। पुरई झंडारोहण की तैयारी में जुटे थे। चतुरी चाचा की हांक पर मैं भी चबूतरे पर पहुंच गया। तभी प्रधान जी की बुलेरो गाड़ी चबूतरे के सामने आकर रुकी। प्रधान जी अपने साथ तिरंगे झंडे, लडडू और फूल-माला भी लाये थे। उनके समर्थकों ने सारा सामान चबूतरे पर सजा दिया। प्रधान जी ने सबसे पहले चतुरी चाचा से झंडारोहण कराया। फिर उन्होंने सभी परपंचियों का फूल-माला से स्वागत-सत्कार किया। प्रधान जी व चतुरी चाचा ने एक दूसरे को गुलाब की माला पहनाई। प्रधान जी ने गांव के सभी बच्चों को तिरंगे झंडे दिए। फिर चतुरी चाचा की अगुवाई में तिरंगा रैली निकाली गई। गांव का पूरा चक्कर लगाकर रैली फिर प्रपंच चबूतरे पर आ गयी। प्रधान जी ने बच्चों को लडडू, बताशे और अन्द्रसा की कुरकुरी गोलियां वितरित की। चतुरी चाचा ने प्रधान व उनके करिन्दों का मुंह मीठा कराया। इसके बाद प्रधान बोले- तुम पंच प्रपंच करव। हम पंचायत भवन जाइके काल्हि केरी तैयारी करी जाय। प्रधान जी के विदा होते ही ककुवा ने प्रपंच शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कस्बा बक्सीताल और बड़ी बाजार में राष्ट्रभक्ति तिरंगे के रूप में कल से लहरा रही है। आज और कल यानी 15 अगस्त को हर गांव-गली में तिरंगा लहराएगा। उनका मन कर रहा है कि गांव-जवार में घूमकर तिरँगा लहराते देखें।


चतुरी चाचा ने कहा- काल्हि 15 अगस्त हय। देस का आजाद भए 75 साल पूरे होइ जैहैं। अपन देस आजादी क अमृत महोत्सव मनाय रहा हय। तेरह अगस्त ते 15 अगस्त तलक घर-घर तिरंगा फहरावै केरा अभियान चलि रहा हय। समूचे भारत म जगह-जगह तिरंगा रैलियां निकर रही हयँ। तबहिन तौ हम परधानजी ते गांव म तिरंगा रैली निकारय कहा रहय। साथे हम यहौ कहा रहय कि इतवार का प्रपंच चबूतरा प झंडारोहण होई। आजु युहु कार्यक्रम होय गवा। काल्हि पंचायत भवन अउ प्राइमरी स्कूल चलेव सब जने। प्रधानमंत्री मोदी क हजरन सलाम। उन्हिन क चलते देस म राष्ट्रभक्ति चरम पय हय। मुला, देस क दुश्मनव अपन कामु कय रहे हयँ। उनहुन प नजर राखय का परी। उई जमाने म देस म एकु जयचंद रहय। अब तौ हर शहर म एकु-दुई जयचंद हयँ। इ ससुरे विदेशी आतंकवादिन ते मिलिके अपनय देस क तबाह कराय रहे। शुक का कुछ जयचंदी आतंकी दबोचे गये रहयं। इनके फन नीके कुचले जायँ। बताव, हमरे देस क क़तने सैनिक-सिपाही आतंकवाद ते लड़य म शहीद होय चुके। देस भर मा कतना जानमाल का नुकसान होय चुका। आजादी का अमृत महोत्सव हम सब जने का युहु मौका दिहिस हय कि हम पंचे स्वतंत्रता सग्राम सेनानी का अउ अमर शहीदन यादि करी। उनका नमन…वंदन करी।


इसी बीच चंदू बिटिया परपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गयी। आज जलपान में अमृत महोत्सव के लड्डू, बताशे और अन्द्रसा की मीठी गोलियां थीं। साथ में, तुलसी-अदरक की कड़क चाय थी। परपंचियों ने मन मुताबिक मिठाई खाई। फिर चाय के कुल्हड़ उठा लिये। चाय के बाद बड़को अपनी बहू नदियारा सँग पच्छेहार लौकी काटने चली गईं। बड़के दद्दा व मुंशीजी को प्रधानजी फोन करके पंचायत भवन पर बुला लिया।


कासिम चचा ने प्रपंच को आगे बढ़ाते हुए कहा- घर-घर तिरंगा अभियान से मुल्क में एक नया जोश आया है। देशभक्ति की यह उमंग बनी रहनी चाहिए। बात सिर्फ तीन दिन तिरँगा लहराने से नहीं बनेगी। देश में आमूलचूल परिवर्तन सिर्फ तिरँगा रैली निकालने से नहीं आएगा। इसके लिए युवाओं को देश और समाज के लिए रोज कुछ न कुछ करना होगा। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने मादरे वतन पर मर मिटे। देश के लिए कुछ न कुछ हर व्यक्ति को करना चाहिए। देश के साथ ग़द्दारी करने वालों का अंजाम बड़ा भयानक होना चाहिए। आजादी का अमृत महोत्सव तब सफल माना जायेगा। जब हम लोग जाति, मज़हब, इलाका व बोली के लिए आपस में लड़ना छोड़ देंगे। हम सब एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। भारत को शक्तिशाली राष्ट्र बनाकर ही दम लेंगे। इस 15 अगस्त को ऐसा प्रण हम सबको लेना चाहिए।


मैंने कोरोना अपडेट देते हुए प्रपंचियों को बताया कि विश्व में अब तक करीब 59 करोड़ 40 लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें करीब 64 लाख 52 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अब तक चार करोड़ 42 लाख से ज्यादा लोग कोरोना पीड़ित हो चुके हैं। इनमें पांच लाख 27 हजार लोग काल कलवित हो चुके हैं। भारत में अभी तक कोरोना वैक्सीन की 207 करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी हैं। देश की 93.7 करोड़ आबादी को कोरोना के दोनों टीके लग चुके हैं। भारत में टीकाकरण अभियान प्रगति पर है। देश में बूस्टर डोज भी बड़ी तेजी से लगाई जा रही है। भारत के मुफ्त टीकाकरण की सर्वत्र सराहना हो रही है।


अंत में चतुरी चाचा ने स्वतंत्रता दिवस और आजादी के अमृत महोत्सव की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही के साथ फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!