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चंडीगढ़/ भारत में सेकेंड हैंड स्मोक से बढ़ता है आर्थिक बोझ : अध्यन

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✍️ सोहन रावत, चंडीगढ़

 

चंडीगढ़ : जर्नल ऑफ निकोटीन एंड टोबैको रिसर्च में प्रकाशित राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज के एक नए अध्ययन ने पहली बार भारत में सेकेंड हैंड स्मोक (व्यक्ति के मुंह से निकला सिगरेट/बीड़ी का धुआं) एक्सपोजर के जबरदस्त आर्थिक बोझ को निर्धारित किया है। निष्कर्षों के अनुसार, सेकेंड हैंड स्मोक के कारण सालाना स्वास्थ्य देखभाल की लागत में 567 अरब रुपये का योगदान होता है, जो तंबाकू के उपयोग से होने वाले वार्षिक आर्थिक बोझ में 1773.4 अरब रुपये (27..5 अरब डॉलर) के चौंका देने वाले कुल वार्षिक स्वास्थ्य देखभाल व्यय का 8 प्रतिशत है।

पहली बार, यह नया अध्ययन भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए सेकेंड हैंड धुएं के भारी वित्तीय टोल पर प्रकाश डालता है। यह भी पता चलता है कि सेकेंड हैंड धुआं महिलाओं, युवाओं और कम आय वाले लोगों सहित भारत की सबसे कमजोर आबादी को व्यापक रूप से प्रभावित करती है। राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने सार्वजनिक डेटा स्रोतों और 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के धूम्रपान न करने वालों के बीच सेकेंड हैंड धुएं के निरंतर संपर्क की स्वास्थ्य देखभाल लागत को मापने के लिए एक प्रसार-आधारित जिम्मेदार जोखिम दृष्टिकोण का उपयोग किया। 567 बिलियन रुपए का आंकड़ा सेकेंड हैंड धुएं के जोखिम की कुल आर्थिक लागत का केवल एक हिस्सा दर्शाता है। इसमें खोई हुई उत्पादकता, रुग्णता, और बीमारी के कारण होने वाली मृत्यु और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क से उत्पन्न होने वाली प्रारंभिक मौतों के कारण अतिरिक्त अप्रत्यक्ष आर्थिक लागत शामिल नहीं है, जो अंतिम आंकड़े को और बढ़ा देगा।

अध्ययन के लेखक और अर्थशास्त्री डॉ. रिजो जॉन के अनुसार, ‘‘बड़ी संख्या में धूम्रपान करने वालों और तंबाकू से संबंधित बीमारियों के इलाज के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए भारत को कड़े कदम उठाने की जरूरत है। तंबाकू कर बढ़ाना धूम्रपान को कम करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है, फिर भी भारत में पिछले चार वर्षों से किसी भी तंबाकू उत्पाद पर कोई महत्वपूर्ण कर वृद्धि नहीं हुई है। भारत में सभी तंबाकू उत्पादों से एकत्रित वर्तमान तंबाकू कर, सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने के कारण स्वास्थ्य देखभाल लागत में 567 अरब रुपए से भी कम है। ’’

श्री आशिम सान्याल, सीईओ, कंज्यूमर वॉयस (संगठन प्रमुख) के अनुसार, ‘‘भारत ने जहां तंबाकू के उपयोग को कम करने में प्रगति की है, वहीं धूम्रपान स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ को लगातार बढ़ा रहा है। भारत मजबूत तंबाकू नियंत्रण नीतियों के माध्यम से लाखों लोगों की जान बचा सकता है और इस भारी बोझ को कम कर सकता है। भारत को धूम्रपान मुक्त बनाने के लिए सार्वजनिक स्थान से सभी निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों को हटाने के लिए सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 को मजबूत करना और सभी तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना अब जरूरी और महत्वपूर्ण फैसला बन गया है। ये नीतियां लाखों भारतीयों को तंबाकू छोडऩे और युवाओं को तंबाकू का सेवन शुरू करने से रोकने में मदद करेंगी।’’

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