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सहरसा/ कोरोना महामारी के दौर में कलाकारों को सरकार द्वारा आर्थिक सहयोग दिया जाए : मुकेश मिलन

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कोरोनाकाल का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव कलाकारों पर ही पड़ा है

भोजन और इलाज के अभाव में परिवार के सदस्यों को बचा नही पा रहे हैं कलाकार

सहरसा : विगत दो वर्षों से अधिक बीत जाने पर भी कोरोना महामारी के कारण लगातार लॉक डाउन या अनेक बंदिशें और सरकार द्वारा कलाकारों के लिए उचित और स्थायी समाधान नहीं निकालने के कारण कलाकारों के समक्ष भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है । इतना ही नहीं, उन्हें अपने अपने परिवार के लोगों का इलाज करवाना भी मुश्किल हो गया है । कुछ कलाकारों के पारिवारिक सदस्य समुचित इलाज न होने के कारण इस दुनिया से चल बसे हैं । सरकार को कलाकार की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ।

बिहार में खासकर पूर्णिया व कोशी प्रमंडल में अथक संघर्ष कर अपनी पहचान बना चुके उद्घोषक एवं संगीत शिक्षक मुकेश मिलन ने उक्त गंभीर समस्या पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए सरकार से शीघ्र ही इसके निदान की माँग की है । उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौर में लगभग सभी वर्गों के लिए सरकार पहल कर रही है, कुछ गैर-सरकारी व्यक्ति तो छोटा-मोटा धंधा भी कर अपना और अपने परिवार का गुजारा कर लेते है परंतु कलाकार ही एकमात्र ऐसा वर्ग है जिसे हर तबके के लोग प्रतिष्ठा देकर अपने से ऊपर मंच पर उन्हें सुशोभित कर गौरवान्वित महसूस करते हैं साथ ही सरस्वती पुत्र कहे जाने वाले जो सिर्फ संगीत की साधना पर विश्वास कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं जिन्हें दूसरे किसी हुनर के ज्ञान की आवश्यकता तक नही पड़ी,आज आस लगाए बैठे हैं कि ये लॉक डाउन या बंदिशों का सिलसिला कब खत्म होगा ?

गौर करने की बात है कि ये कलाकार अपने स्वाभिमान को खत्म कर सड़क पर छोटे-मोटे रोजगार तो कर नहीं सकते, परिवार के दायित्व का बोझ नही उठाने की मजबूरी के फलस्वरूप कलाकार और उनके परिवार के सदस्य भुखमरी और इलाज आदि के अभाव में एक-एक कर मरते जा रहे है, 2 वर्षों बाद भी एक-एक दिन पहाड़ सा लगने लगा है, सरकार के बनाये नियमों से लगभग सभी तरह के लोगों का काम तो किसी तरह चल रहा है लेकिन डी. जे. और सभी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पाबंदी ने इस वर्ष के भी शादी और त्योहारों में रोजगार की आस लगाए कलाकारों के दिल पर कुठाराघात कर इन्हें पंगु बना सदमे में डाल दिया है । इससे बहुत सारे कलाकार डिप्रेशन में जाकर अपनी विद्या तक भूल गए हैं और न जाने कितने कलाकार उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और पंडित बिरजू महाराज के राह पर चल देश का नाम रौशन करने से पहले बिखर जायेंगें ।

आगे श्री मिलन ने कहा की अगर सरकार कलाकार की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए स्थाई प्रोत्साहन योजना और लॉक डाउन में कुछ ढिलाई देकर अतिशीघ्र इसका समाधान नही करती है तो बिहार की सांस्कृतिक एवं कलात्मक पीढ़ी भुखमरी का शिकार होकर लुप्त हो जाएगी । इसे पुनर्जीवित करने में कई दशक लग जाएँगे ,इसलिए इसपर सरकार को ध्यान देना नितांत आवश्यक है ।

गौरतलब हो कि मध्य विद्यालयों में 17 हजार के लगभग संगीत शिक्षकों की बहाली की रूपरेखा शिक्षा विभाग (बिहार सरकार) ने वर्षों पहले तैयार की थी जिसका पद सृजित कर बहाली तो अब तक हुई ही नही बल्कि हाई स्कूलों में पद सृजित के बाबजूद बहुत सारे पद रिक्त पड़े हैं । ऐसे रिक्त पदों पर भी संगीत शिक्षकों की बहाली पर पूरी तरह से ग्रहण लगा हुआ है । कालाकारों में असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है । वे कब तक रोजगार की आस में बैठे रहेंगे ।

कलाकारों की इस विवशता और समस्याओं पर कलाकार संघ ने भी क्षोभ व्यक्त कर आवाज उठाई है और सरकार से इसके शीघ्र निदान की माँग की है ।

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