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चंडीगढ़/ प्रशासक ने फाॅस्वेक द्वारा रखी गई समस्याओं को सुलझाने का दिया भरोसा

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✍️ मनोज शर्मा, चंडीगढ़

 

चंडीगढ़ : फेडरेशन ऑफ सैक्टर वेल्फेयर एसोसिएशनस ऑफ चंडीगढ़ (फाॅस्वेक) का एक शिष्टमंडल चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित से मिला और उन्हें चंडीगढ़ शहर की प्रमुख समस्याओं के बारे में अवगत कराया। फाॅस्वेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले 60 हजार से अधिक परिवार हर समय डर के साए में जीते हैं कि कब हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी उनका मकान तोड़ने के लिए आ जाएं। बिट्टू ने कहा कि यदि लोगों द्वारा आवश्यकतानुसार किए गए बदलावों से इमारत की स्थिरता पर असर नहीं पड़ता और न ही सरकारी जमीन पर कोई अतिक्रमण है तो ऐसे बदलावों को लोगों से एक-मुश्त मामूली धनराशि लेकर नियमित किया जाना चाहिए क्योंकि समय के अनुसार लोगों के परिवार बढ़े हैं और उस हिसाब से उनकी जरूरतें भी बढ़ी हैं। लोगों को मकानों की चारदीवारी के अंदर किए गए मामूली बदलावों के लिए नोटिस भेजकर अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड मकानों को लीज-होल्ड से फ्री-होल्ड करने के नाम पर अलाटीज से वर्तमान कलैक्टर रेट के हिसाब से बड़ी राशि वसूल करता है जो सरासर गलत है और अलॉटमेंट मूल्य पर ही मूल्यांकन करके मकानों को फ्री-होल्ड किया जाना चाहिए।
फाॅस्वेक के महासचिव जे.एस. गोगिया ने कहा कि चाहे चंडीगढ़ के सौंदर्यीकरण की बात हो या सड़कों के रख-रखाव की या घरों से कूड़ा एकत्रित करने की या पेड पार्किंग की, नगर निगम की कार्यशैली से चंडीगढ़ की हालत बद से बदतर होती जा रही है और लोगों को भी भारी असुविधा हो रही है। पानी की 3 गुना तक बढ़ाई गई दरें और उस पर लगाए जाने वाला 30 प्रतिशत सीवरेज सेस भी पूरी तरह से नाजायज हैं। गोगिया ने कहा कि नगर निगम और प्रशासन के कार्यों में यदि रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशनस की भागीदारी बढ़ाई जाए तो नतीजे कहीं बेहतर आ सकते हैं।

फाॅस्वेक के मुख्य प्रवक्ता और सैक्टर 38 वैस्ट आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि डड्डू माजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड से उठते जहरीले प्रदूषण और असहनीय बदबू के कारण आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग न केवल नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं बल्कि गंभीर बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं। लोगों के जीने के मौलिक अधिकार को देखते हुए डंपिंग ग्राउंड और गार्बेज प्रोसेसिंग प्लांट को यहां से हटाकर आबादी से कहीं दूर शिफ्ट किया जाना चाहिए और साथ ही मरे हुए जानवरों के निष्पादन प्लांट को भी सैक्टर 25 में न लगाकर कहीं और लगाया जाना चाहिए। पंकज गुप्ता ने प्रशासक से निवेदन किया कि वास्तविक स्थिति को जानने के लिए वह स्वयं डंपिंग ग्राउंड और गार्बेज प्रोसेसिंग प्लांट का औचक निरीक्षण करें।

फाॅस्वेक की ओर से इस संबंध में प्रशासक को लिखित ज्ञापन भी सौंपे गए जिस पर उन्होंने कहा कि सभी सुझावों और समस्याओं का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा और चंडीगढ़ प्रशासन इस संबंध में उचित फैसले शीघ्र ही लेगा।

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