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दरभंगा/ अग्निशमन सेवा सप्ताह के अवसर पर ‘अग्नि-सुरक्षा : जागरूकता एवं उपाय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित

✍️ हरिमोहन चौधरी, दरभंगा (बिहार)

डा0 प्रभात दास फाउंडेशन तथा भारत विकास परिषद् की भारती-मंडन शाखा द्वारा वेबीनार का भी किया गया आयोजन

सतर्कता से अगलगी की 90% तक घटनायें हो सकती हैं नियंत्रित- शशिभूषण सिंह

अगलगी की घटना को रोकने हेतु हर जगह हो प्रशिक्षित अग्नि-सुरक्षा स्वयंसेवकों की टोली- अनिल कुमार

अधिकांश अगलगी की घटनाएं मानव निर्मित आपदा,जागरूकता से बचाव संभव- प्रो रितिका मौर्या

अगलगी से भारत में 440 करोड़ से अधिक की संपत्ति की वार्षिक हानि- डा चौरसिया


दरभंगा : यदि आग नियंत्रित हो तो वरदान है, पर यदि अनियंत्रित हो जाए तो आग अभिशाप बन जाता है। मानवीय सतर्कता से अगलगी की 90% तक घटनाएं रोकी जा सकती हैं। यदि नियमित जागरूकता कार्यक्रम चले तथा समाज के लोग सतर्क रहें तो अगलगी से उत्पन्न क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है। उक्त बातें दरभंगा के फायर स्टेशन मास्टर शशि भूषण सिंह ने डॉ प्रभात दास फाउंडेशन,दरभंगा तथा भारत विकास परिषद् , भारती-मंडन शाखा,दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में अग्निशमन सेवा सप्ताह (14 से 20 अप्रैल) के अवसर पर “अग्नि-सुरक्षा : जागरूकता एवं उपाय” विषयक वेबीनार में मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि 1944 में मुंबई में हुई मालवाहक जहाज में आगलगी की घटना में 66 व्यक्तियों के शहीद होने की याद में अग्नि-सप्ताह मनाया जाता है। गर्मी में पछुआ हवा के कारण आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। हमें जागरूक रहकर बच्चों को आग से खेलवाड़ करने से रोकने तथा बिजली के तारों की भी क्षमतानुसार ही उपकरण लगा, झोपड़ियों को मिट्टी-बालू से लेप लगाकर तथा आग के स्थल पर पर्याप्त पानी की व्यवस्था कर अगलगी की घटनाएं कम की जा सकती हैं।


मुख्य वक्ता के रूप में सी एम कॉलेज, दरभंगा की एनएसएस पदाधिकारी प्रो रितिका मौर्या ने कहा कि अधिकांश अगलगी की घटनाएं मानव निर्मित आपदा हैं, जिसे जागरूकता लाकर रोका जा सकता है।अगलगी की घटना से सबसे बड़ी सुरक्षा लोगों की सक्रियता एवं सावधानी है। हमें अल्कोहल युक्त सेनेटाइजर सहित अन्य ज्वलनशील पदार्थों को आग से दूर रखना चाहिए।


अध्यक्षीय संबोधन में परिषद् के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि अगलगी की घटना को रोकने हेतु हर जगह प्रशिक्षित अग्नि-सुरक्षा स्वयंसेवकों की टोली होनी चाहिए। खेत-खलिहानों के पास पर्याप्त जलस्रोत बनाएं, बहुमंजिला इमारतों में सरकारी नियमों का पूरा पालन हो तथा हर घर में अग्निशमन यंत्र हो तो अगलगी की घटनाएं स्वतः कम हो जाएंगी। अगलगी की स्थिति में सबसे पहले बिजली के उपकरणों को स्विच ऑफ कर देनी चाहिए।

ऑनलाइन जुड़े फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने कहा कि अगलगी की स्थिति में हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्थिति के अनुसार अपने बुद्धि-विवेक से पहले सभी व्यक्तियों को सुरक्षित करना चाहिए, उसके बाद धन- संपत्ति को भी बचाना चाहिए।

परिषद के सचिव डा आर एन चौरसिया ने कहा कि सिर्फ अगलगी से भारत में प्रतिवर्ष 440 करोड़ से अधिक की संपत्ति नष्ट हो जाती है। आग बुझाने के लिए हमें आसपास बालू,मिट्टी तथा पानी को इकट्ठा रखना चाहिए। समय-समय पर लूज बिजली वायरिंग की मरम्मत करनी चाहिए तथा खाना सुबह 9:00 बजे से पहले एवं 6:00 बजे शाम के बाद बनाना चाहिए। वहीं सूती कपड़े का इस्तेमाल करते हुए खाना बनाते समय कभी भी पॉलिस्टर या ट्रैरलिंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए।

वेबीनार में अमरजीत कुमार, नूतन कुमारी, प्रिया कुमारी, कमलेश कुमार साह, साकेत चौधरी, संजीत कुमार झा, कमलेश कुमार, हिमांशु कुमार, रत्नेश कुमार,अनिल कुमार सिंह, राजन कार्तिक, कुमार संजीव, डा लक्ष्मण यादव, जूही झा, रमेश कुमार, डा शशि शेखर, डा ममता सिंह, आलोक कुमार, राजू सिंह, पूजा सिंह, मो अरबाज खान, डा शंभू मंडल तथा मोहन जी राय सहित अनेक व्यक्तियों ने जुड़कर अपने-अपने विचार रखें।

पार्षद मिथिलेश कुमार साहनी के संचालन में आयोजित सेमिनार में आगत अतिथियों का स्वागत फाउंडेशन के कार्यकर्ता राजकुमार गणेशन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नितेश कुमार राय ने किया।